हर्बल कुंभ में मंत्रियों का भरोसा: हर्बल क्रांति से बदलेगी उत्तराखंड की तस्वीर, पलायन थमेगा और समृद्ध होंगे पहाड़ के गांव
Ministers' trust in Herbal Kumbh: The herbal revolution will change the picture of Uttarakhand, migration will stop and mountain villages will be prosperous
आचार्य बालकृष्ण बोले, कृषि आधारित नवाचार और दुनिया को जोड़ने का विश्वस्तरीय केंद्र बनेगा श्री धन्वंतरि धाम,

कुलदीप कुमार, पौड़ी गढ़वाल/ऋषिकेश/हरिद्वार। उत्तराखंड में पलायन की चुनौती से निपटने और पर्वतीय क्षेत्रों की आर्थिकी को मजबूत बनाने के लिए पारंपरिक खेती के साथ जड़ी-बूटी एवं औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देना होगा। राज्य सरकार उत्तराखंड को हर्बल स्टेट के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। पतंजलि के प्रयास इस संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कृषि मंत्री गणेश जोशी, ग्रामीण विकास एवं एमएसएमई मंत्री भरत चौधरी तथा बद्री-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने प्रथम हर्बल कुंभ एवं द्वितीय धन्वंतरि महोत्सव के दूसरे दिन मालागांव में आयोजित कार्यक्रम में यह विश्वास जताया।
इस अवसर पर आयुर्वेद शिरोमणि आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि हर्बल कुंभ का आयोजन अपने उद्देश्य की दृष्टि से सफल हो गया है। कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़े दोनों कैबिनेट मंत्रियों की उपस्थिति इस आयोजन की प्रासंगिकता को और व्यापक बनाती है। खेती-बाड़ी, किसान, कुटीर उद्योग और स्वरोजगार इस आयोजन के मूल केंद्र में हैं। उन्होंने कहा कि हर्बल कुंभ उत्तराखंड की समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देगा और पहाड़ों से पलायन रोकने में भी महती भूमिका निभाएगा। यह कृषि आधारित नवाचार का विश्वस्तरीय केंद्र बनेगा। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि देश-दुनिया के लोग विभिन्न मीडिया माध्यमों से हर्बल कुंभ से जुड़ रहे हैं। इस आयोजन के प्रति लोगों की भावनाएं लगातार जुड़ रही हैं और इसका संदेश व्यापक स्तर पर पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि पतंजलि ने परम पूज्य स्वामी रामदेव जी के मार्गदर्शन में योग और आयुर्वेद को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया है। श्री धन्वंतरि धाम के निर्माण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अक्सर विकास के साथ प्रकृति का विनाश भी होता है, लेकिन यहां प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना उसकी सुंदरता और दिव्यता को निखारने का प्रयास किया गया है। आज इसका स्वरूप दिखाई देने लगा है। श्री धन्वंतरि धाम भविष्य में दुनिया को जोड़ने का माध्यम बनेगा। उन्होंने तीनों अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पतंजलि के साथ उनका जुड़ाव और भावनात्मक संबंध संस्थान के लिए गौरव की बात है। हर्बल कुंभ दुनिया के कल्याण और उत्तराखंड के लोगों की समृद्धि का माध्यम बने, यही कामना है।
हर्बल खेती से गांवों की अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती: भरत चौधरी
कैबिनेट मंत्री भरत चौधरी ने कहा कि परम पूज्य स्वामी रामदेव जी और आचार्य बालकृष्ण जी के प्रयासों से ही इस तरह के व्यापक आयोजन संभव हो पा रहे हैं। आयुर्वेद की समृद्ध परंपरा धीरे-धीरे मुख्यधारा से दूर होती जा रही थी, लेकिन आचार्य बालकृष्ण ने इसे फिर से प्रतिष्ठा दिलाने और वैश्विक स्तर पर सम्मान स्थापित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने कहा कि प्रकृति अपने आप में पूर्ण है। मनुष्य जब प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करता है तो उसका दुष्परिणाम सामने आता है। आहार और विहार का जीवन तथा शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जड़ी-बूटियों का प्रदेश है। संजीवनी बूटी और द्रोणागिरि पर्वत से जुड़ा प्रसंग भी इस क्षेत्र की औषधीय एवं सांस्कृतिक महत्ता को दर्शाता है। श्री चौधरी ने कहा कि सरकार प्रत्येक व्यक्ति को सरकारी नौकरी नहीं दे सकती। ऐसे में स्वरोजगार को बढ़ावा देना आवश्यक है। स्वयं सहायता समूह इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। पतंजलि के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को हर्बल स्टेट के रूप में विकसित करने की सरकार की मंशा है। उन्हें विश्वास है कि राज्य की आर्थिकी को मजबूत बनाने और युग परिवर्तन की दिशा में पतंजलि का योगदान महत्वपूर्ण होगा।
आयुर्वेदिक काढ़ा नहीं होता तो अस्पताल में भर्ती होना पड़ता: गणेश जोशी
कैबिनेट मंत्री एवं कृषि मंत्री गणेश जोशी ने श्री धन्वंतरि धाम के निर्माण और विकास के लिए आचार्य बालकृष्ण की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने इस परिसर का कायाकल्प कर दिया है। इसके लिए आचार्य जी बधाई और सम्मान के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड आयुर्वेद की भूमि है और आयुर्वेद की परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने में पतंजलि ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कोरोना काल के अनुभव साझा करते हुए गणेश जोशी ने कहा कि उन्हें पांच बार कोरोना संक्रमण हुआ। उस दौरान आयुर्वेदिक काढ़े ने उन्हें काफी राहत दी। यदि काढ़ा नहीं होता तो शायद उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ता। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के सामने पलायन एक बड़ी चुनौती है। गांव खाली हो रहे हैं। ऐसे में आचार्य बालकृष्ण जी जिस दिशा में काम कर रहे हैं, उसे व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जाए तो पलायन रोकने के साथ राज्य की आर्थिकी भी मजबूत हो सकती है। कृषि मंत्री ने राज्य में कृषि एवं बागवानी के क्षेत्र में नवाचार और आधुनिक तकनीक अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने लक्ष्य जताया कि वर्ष 2030 तक उत्तराखंड सेब उत्पादन के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के समकक्ष पहुंच सकता है। उन्होंने किसानों से पारंपरिक खेती के साथ औषधीय पौधों की खेती अपनाने की अपील की। मोटे अनाज (मिलेट्स) के महत्व और उनके पोषण संबंधी लाभों का उल्लेख करते हुए कहा कि पतंजलि और राज्य सरकार मिलकर इस दिशा में बड़े स्तर पर काम करेंगे।
धन्वंतरि धाम को देखने आएगी पूरी दुनिया: हेमंत द्विवेदी
बद्री-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि प्रथम हर्बल कुंभ और द्वितीय श्री धन्वंतरि महोत्सव का हिस्सा बनना उनके लिए सौभाग्य की बात है। चार से छह नवंबर तक आयोजित यह आयोजन आने वाले समय में इतिहास के पन्नों में दर्ज होगा। उन्होंने कहा कि आचार्य बालकृष्ण जी ने इस क्षेत्र में जंगल में मंगल कर दिया है। एक समय ऐसा आएगा जब पूरी दुनिया श्री धन्वंतरि धाम को देखने आएगी। पर्वतीय क्षेत्रों से हो रहे पलायन पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि पहाड़ों की इस चुनौती का समाधान पारंपरिक खेती के साथ जड़ी-बूटी आधारित कृषि को प्रोत्साहित करके निकाला जा सकता है। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे तथा गांवों की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
दीप प्रज्ज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का संचालन पतंजलि अनुसंधान संस्थान जड़ी-बूटी प्रभाग की प्रभागाध्यक्ष और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वेदप्रिया आर्य ने किया। उन्होंने कहा कि ‘हर्बल कुंभ’ नाम पहली बार दिया गया है। इसका उद्देश्य जड़ी-बूटियों को प्रोत्साहित करने के साथ इस क्षेत्र में नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि परम पूज्य स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने योग एवं आयुर्वेद को घर-घर तक पहुंचाया है। पतंजलि ने 700 से अधिक शोधपत्रों के माध्यम से आयुर्वेद को साक्ष्य आधारित स्वरूप में प्रस्तुत किया है, जिससे वैश्विक स्तर पर इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति के प्रति ध्यान आकर्षित हुआ है।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर कृषि मंत्री गणेश जोशी, ग्रामीण विकास एवं एमएसएमई मंत्री भरत चौधरी तथा बद्री-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति एवं आयुर्वेद शिरोमणि आचार्य बालकृष्ण ने शॉल ओढ़ाकर और रुद्राक्ष की माला पहनाकर स्वागत किया। कार्यक्रम में पतंजलि आयुर्वेद कॉलेज, गुरुकुल चोटीपुरा के विद्यार्थियों, संतों और अन्य गणमान्य लोगों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। कार्यक्रम के बाद अतिथियों ने हर्बल कुंभ में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों से उनके उत्पादों, गतिविधियों और कार्यों की जानकारी ली। इसके बाद अतिथियों ने श्री धन्वंतरि धाम का भ्रमण किया और वहां स्थापित भगवान धन्वंतरि की दिव्य एवं भव्य प्रतिमा के दर्शन कर परिसर की विशेषताओं का अवलोकन किया।

