कनाट प्लेस थाना में नये कानूनों को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

Awareness program organized about new laws at Connaught Place police station

नई दिल्ली,कनाट प्लेस थाना परिसर में एक जुलाई से लागू नये अपराधिक कानूनों को समझाने के लिये जागरूकता कार्यक्रम सह जनसभा का आयोजन किया गया। जिसमें लोगों को नये कानूनों के बारे में जानकारी दी गई। जिसमें एसीपी, एसएचओ, इंस्पेक्टर कानूनी सलाहकार, एमडब्ल्यूए, आरडब्ल्यूए, आईओ व अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।कानूनों को जानने के लिये थाने आने वाले लोगों के लिये ड्यूटी ऑफिसर रूम में एक नागरिक कोना बनाया गया है जिसमें सभी नए कानूनों के बारे में प्रासंगिक विवरण, पत्रक आदि मौजूद हैं। जिसको एक सरल भाषा में समझाने की कोशिश की गई।जनसभा कार्यक्रम में बताया गया कि नये कानून की एक विशेषता है कि पहले हम अंगे्रजी का हिन्दी में ट्रांस्लेशन करते थे। लेकिन पहली बार है कि जो ऑरिजनल नाम है वो हिन्दी में है। इसका कोई अंग्रेजी वर्जन हो ही नहीं सकता। ये हिन्दी भाषा जो हमारी भाषा है। उसकी तरफ एक ओर कदम बढ रहा है। पहले का कानून सजा की बात करता था। अब यहां पर न्याय की बात हो रही है, न्याय का ये मतलब नहीं हैं कि सजा नहीं मिलेगी।जहां जरूरी है वहां पर ज्यादा मिलेगी। कुछ चीजों को हटा दिया गया है, क्योंकि उनकी कोई जरूरत नहीं थी। करीब 33 मामले ऐसे हैं, जिसमें सजा को बढ़ाया गया है। जबकि 83 मामले ऐसे हैं जिसमें जुर्माना राशि को बढा दिया गया है। कानूनों में बदलाव के लिये काफी सालों में एक एक चीज को देखकर उसका भविष्य में क्या असर होगा, उसका गलत इस्तेमाल न हो, सभी चीजों पर विचार करके ही इन कानूनों को बनाया गया है। जिसको समझना सभी के लिये जरूरी भी है।अधिकारियों ने बताया कि भारत में एक और एतिहासिक बदलाव आ गया है। इस बार 1860 में बनी आईपीसी की जगह भारतीय न्याय संहिता, 1898 में बनी सीआरपीसी की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और 1872 के इंडियन एविडेंस एक्ट की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम ने ली है।

अंग्रेजों के बनाए सभी कानून पूरी तरह से खत्म हो गए हैं। कुछ कहावतों में जिस तरह से किसी को बोल दिया जाता था कि तू क्या 420 है, लेकिन अब ऐसा नहीं बोला जा सकेगा। क्योंकि 420 की जगह 318 ने ले ली है। इसी तरह से हत्या 302 की जगह 103 ने ले ली है। तीनों नए कानूनों के लागू होने और उनकी धाराओं में बदलाव होने के बाद से दिल्ली पुलिस ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों की पुलिस ने थानास्तर से लेकर पब्लिक मीटिंगें करके इन कानूनों और धाराओं को समझाया गया। कोर्ट में भी जज व वकीलों ने भी अपने को नये तरीके से समझा है।

 

 

 

 

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