सीईजीआर ने किया ‘बाई-एनुअल एडमिशन’ पर वेबिनार का आयोजन

CEGR organizes webinar on ‘Bi-Annual Admission’

कई शिक्षाविदों ने कहा यूजीसी की सराहनीय पहल है बाई-एनुअल एडमिशन प्रक्रिया, तो कुछ ने
खामियां भी गिनाई


नई दिल्ली. देश में शिक्षा के क्षेत्र में एक अग्रणी थिंक टैंक सेंटर फॉर एजुकेशन ग्रोथ एंड रिसर्च (सीईजीआर) ने
‘बाई-एनुअल एडमिशन’ विषय पर वेबिनार का आयोजन किया. इस वेबिनार में देश भर से कई चांसलर, वाईस
चांसलर और शिक्षाविद ने भाग लिया. आपको बता दें अभी हाल ही में यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने
यूनिवर्सिटीज और हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स में साल में दो बार एडमिशन की प्रक्रिया शुरू करने की मंजूरी दी है.
मसलन अब यूनिवर्सिटी और कॉलेज में साल में 2 बार स्टूडेंट्स को एडमिशन लेने का मौका मिलेगा. इस विषय पर
सीईजीआर ने देश भर के शिक्षाविदों को जोड़ते हुए वेबिनार का आयोजन किया. वेबिनार में एनआईसीएमआर
यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. अनील कश्यप, एकेएस यूनिवर्सिटी के प्रो-चांसलर अनंत सोनी, एएसएम ग्रुप ऑफ़
इंस्टीट्यूट के चेयरमैन डॉ. संदीप पचपांडे, आईएसबीआर ग्रुप ऑफ़ इंस्टीटूशन्स के फाउंडर एंड एमडी डॉ. मनीष
कोठरी, ओसवाल एजुकेशन ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ. भरतेश शाह, आर.वी इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट के प्रोफेसर एंड
डायरेक्टर डॉ. पुरुषोत्तम बंग, एकेजीआईएम, गाजियाबाद के प्रोफेसर एंड डायरेक्टर डॉ. टी. आर. पांडेय, राउरकेला
इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट स्टडीज के सेक्रेटरी डॉ. आर्य पटनायक और सीईजीआर के डायरेक्टर रविश रोशन समेत
कई शिक्षाविद शामिल हुए. वेबिनार को संबोधित करते हुए एएसएम ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूट के चेयरमैन डॉ. संदीप
पचपांडे ने कहा कि साल में दो बार एडमिशन से स्टूडेंट्स के समय बर्बाद होने से बचेंगे साथ ही रोजगार के भी
अवसर बढ़ेंगे. स्टूडेंट के लिए यह बहुत अच्छी पहल है. इससे स्टूडेंट्स के लिए मौके बढ़ेंगे और इंडियन हायर
एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस ग्लोबल स्टैंडर्ड के बनेंगे. शैक्षणिक सत्र 2024-25 के जुलाई-अगस्त और जनवरी-फरवरी में दो
बार प्रवेश प्रक्रिया शुरू की जाएगी. इतना ही नहीं अब कैंपस प्लेसमेंट ड्राइव भी साल में दो बार आयोजित की
जाएगी. इस कदम से जहां साल में दो बार स्टूडेंट्स को एडमिशन पाने का मौका मिलेगा वहीं साल में दो बार
रोजगार पाने का मौका मिलेगा. निश्चित रूप से हर फैसले के कुछ पॉजिटिव पहलु होते हैं तो कुछ नेगेटिव भी होते
है.
राउरकेला इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट स्टडीज के सेक्रेटरी डॉ. आर्य पटनायक ने कहा कि भारतीय विश्वविद्यालयों
और उच्च शिक्षण संस्थानों को अब विदेशी वेश्वविद्यालयों की तर्ज पर साल में दो बार प्रवेश देने की अनुमति
होगी. इससे स्टूडेंट्स का समय तो बचेगा ही और साथ ही स्टूडेंट्स को पहले से ज्यादा अवसर भी मिलेगें. वे छात्र
जो बोर्ड परीक्षा के परिणामों की घोषणा में देरी, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं या व्यक्तिगत कारणों से जुलाई-अगस्त
सत्र में किसी विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने से चूक जाते थे वैसे छात्र अब जनवरी-फरवरी में भी एडमिशन ले सकते
हैं. आर.वी इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट के प्रोफेसर एंड डायरेक्टर डॉ. पुरुषोत्तम बंग ने वेबिनार में बोलते हुए कहा
कि साल में दो बार विश्वविद्यालयों में प्रवेश से छात्रों को प्रेरणा बनाए रखने में मदद मिलेगी, क्योंकि यदि वे
वर्तमान सत्र में प्रवेश से चूक जाते हैं तो उन्हें प्रवेश पाने के लिए एक पूरा वर्ष इंतजार नहीं करना पड़ता था, साल
में दो बार प्रवेश के साथ, उद्योग जगत के लोग भी वर्ष में दो बार अपने ‘कैंपस' चयन की प्रक्रिया संचालित कर

सकते हैं, जिससे स्नातकों के लिए रोजगार के अवसर बेहतर होंगे. वेबिनार का मॉडरेट करते हुए सेंटर फॉर एजुकेशन
ग्रोथ एंड रिसर्च (सीईजीआर) के डायरेक्टर रविश रोशन ने कहा कि शिक्षा राष्ट्र की उन्नति की आधारशिला है.
भारतीय उच्च शिक्षा संस्थान बाई-एनुअल साइकिल ऑफ़ एडमिशन को अपनाते हैं, तो हमारे उच्च शिक्षा संस्थान
अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोग और छात्र आदान-प्रदान को बढ़ा सकते हैं. परिणामस्वरूप, हमारी वैश्विक प्रतिस्पर्धा में
सुधार होगा और हम वैश्विक शैक्षिक मानकों के अनुरूप होंगे. विश्वविद्यालयों के लिए साल में दो बार प्रवेश देना
अनिवार्य नहीं होगा और जिन उच्च शिक्षण संस्थानों के पास आवश्यक ढांचा और शिक्षक संकाय है, वे इस अवसर
का लाभ उठा सकते हैं.

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