“दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी ब्रह्मज्ञान के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति में भगवान राम के तत्व रूप को कर रहे हैं जागृत” – कथाव्यास साध्वी दीपिका भारती जी
“Divine Guru Shri Ashutosh Maharaj Ji is awakening the essence of Lord Rama in every person through Brahma Gyan” – Kathavyas Sadhvi Deepika Bharti Ji

श्रीराम और लक्ष्मण की ताड़क वन यात्रा और राक्षसी ताड़का के साथ उनके युद्ध की गाथा सुनाते हुए, कथा वाचिका साध्वी दीपिका भारती जी ने श्रीराम कथा के दूसरे दिन कहा, “जब-जब भी नैतिकता और धर्म की हानि होती है, तब-तब निर्दोष लोगों की सुरक्षा के लिए, अत्याचार को समाप्त करने के लिए, और धर्म को पुनः स्थापित करने के लिए, भगवान इस धरा पर अवतरित होते हैं”। यह दिव्य सात-दिवसीय श्रीराम कथा दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा 09 से 15 जून 2024 तक परशुराम सेवा सदन( ब्राह्मण भवन ), गौहाटी में शाम 3:00 से 6:30 बजे तक आयोजित की जा रही है।
श्री राम व उनके भाइयों द्वारा गुरुकुल में प्राप्त शिक्षा का विवरण देते हुए कथाव्यास जी ने आज की शिक्षा प्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाया? उन्होंने कहा, “आज हमारे समाज में एक ओर शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी आदि के क्षेत्र में प्रगति हो रही है और दुसरी ओर इसी समाज में अपराध, हिंसा, अमानवीयता जैसे नकारात्मक तत्व भी बढ़ रहे हैं। यह कैसा विरोधाभास है?” संस्थान द्वारा अभावग्रस्त बच्चों के विकास हेतु चलाये जा रहे सम्पूर्ण शिक्षा कार्यक्रम – ‘मंथन’ का उल्लेख करते हुए साध्वी जी ने कहा, “मात्र बाहरी शिक्षा ही पर्याप्त नहीं, बच्चों के भीतर जब तक अध्यात्म का जागरण नहीं होगा उनके भीतर मंथन की प्रक्रिया भी नहीं घट सकती और वे सही गलत का निर्णय लेने में सक्षम नहीं बन सकते। ऐसे में कब उनके पांव गलत राह पर बढ़ जाएँ कोई कुछ नहीं कह सकता। आध्यात्मिक जागरण ही गुरुकुल शिक्षा पद्धति में प्रशिक्षण का प्रथम चरण हुआ करता था।
साध्वी जी ने श्रोतागणों को भगवान राम की एक महान भक्त और आध्यात्मिक रूप से जागृत महिला, अहिल्या के जीवन के आध्यात्मिक रहस्यों से परिचित कराया। उनके त्याग, समर्पण और दृढ़ता ने उन्हें ‘पंचकन्याओं’ (5 महिलाएं जिनके नामों का स्मरण करने से पाप दूर हो जाते हैं) में से एक होने की उपलब्धि दिलाई। साध्वी जी ने पवित्र ग्रंथों में वर्णित ईश्वर प्राप्ति के शाश्वत विज्ञान – ब्रह्मज्ञान के महत्व पर भी चर्चा की। अपने गुरदेव – दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के शब्दों को दोहराते हुए साध्वी जी ने कहा कि कोई भी धर्मग्रंथों के महत्वपूर्ण संदेश से तब तक लाभ नहीं उठा सकता जब तक वे इन्हे उसी तरह समझने में सक्षम न हो जैसा कि उन आत्म ज्ञानी ऋषि मुनियों द्वारा समझा गया था। वे ऋषि मुनि वास्तव में ईश्वर का दर्शन अपने अन्तः करण में किया करते थे। जब हम भी गुरु की कृपा से ईश्वर को देखे लेंगे, तभी हम अपने जीवन को हमारे ऋषि मुनियों की तरह सार्थक कर पायेंगे।
मंच पर विराजमान दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के संगीतकार शिष्यों द्वारा प्रस्तुत मधुर भक्ति गीतों को सुनकर सभी भक्तगण आनंद से झूम उठे।
कार्यक्रम के दूसरे दिन क्षेत्र के विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।
ज्ञात हो कि
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के मार्गदर्शन में स्थापित और संचालित, एक पंजीकृत सामाजिक एवं आध्यात्मिक संस्थान है। ईश्वर-प्राप्ति के शाश्वत विज्ञान – ब्रह्मज्ञान के माध्यम से विश्व शांति की स्थापना के लिए पिछले चार दशकों से संस्थान विश्व स्तर पर काम कर रहा है। संस्थान द्वारा देश भर में कई सामजिक प्रकल्प भी चलाये जा रहे हैं, जैसे – नशा मुक्ति के लिए ‘बोध’ प्रकल्प, अभावग्रस्त बच्चों की शिक्षा हेतु ‘मंथन’ प्रकल्प, महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु ‘संतुलन’ प्रकल्प, पर्यावरण संरक्षण हेतु ‘संरक्षण’ प्रकल्प, गो संरक्षण, संवर्धन एवं नस्ल सुधार हेतु ‘कामधेनु’ प्रकल्प, समाज के सम्पूर्ण स्वास्थय हेतु ‘आरोग्य’ प्रकल्प, आपदा प्रबंधन हेतु ‘समाधान’ प्रकल्प तथा नेत्रहीनो व विकलांगों के सशक्तिकरण हेतु ‘अंतरदृष्टि’ प्रकल्प और जेल के कैदी बंधुओं के सुधार हेतु ‘अंतरक्रांति’ प्रकल्प।
