भारत अनुमानित 6.5 से 7 प्रतिशत की वृद्धि हासिल करने की राह पर: सीईए
India on track to achieve projected 6.5 to 7 per cent growth: CEA

नई दिल्ली, भारत चालू वित्त वर्ष में पूर्व अनुमानित 6.5 से 7 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने की राह पर है। सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने गुरुवार को यह बात दोहराई। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की ओर से आयोजित ग्लोबल इकोनॉमी फोरम 2024 में बोलते हुए नागेश्वरन ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चतताओं से निपटते हुए दीर्घकालिक विकास दर को बनाए रखने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने पूंजी निर्माण, इनोवेशन और संतुलित विकास जैसे प्रमुख घरेलू कारकों को मजबूत बनाने पर जोर दिया। नागेश्वरन ने चालू वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही के दौरान देश की आर्थिक वृद्धि दर में आई सुस्ती पर भी बात की और दोहराया कि भारत अपने राजकोषीय लक्ष्यों को हासिल करने की राह पर है। उन्होंने पूंजी निर्माण को विकास के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण माना और कहा कि अगले पांच वर्षों में निजी क्षेत्र की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। ऐसा कंपनियों की बेहतर लाभप्रदता और मजबूत बैलेंस शीट से संभव हो सकेगा। उन्होंने कृषि, एमएसएमई और ऊर्जा सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा, “विकास को बनाए रखने के लिए इन क्षेत्रों को लक्ष्य आधारित समर्थन की आवश्यकता है।” मुख्य आर्थिक सलाहकार ने भारत के युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य की बढ़ती चुनौती से निपटने की आवश्यकता पर जोर दिया। स्क्रीन की लत, गतिहीन जीवनशैली और खराब खान-पान जैसी समस्याएं इन चिंताओं को और बढ़ा रही हैं। उन्होंने कहा, “यह केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज और निजी क्षेत्र की भी जिम्मेदारी है। अगर भारत को जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाना है, तो भारतीयों को न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए, बल्कि मानसिक रूप से भी स्वस्थ होना चाहिए।” भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे खुली अर्थव्यवस्थाओं में से एक
शिखर सम्मेलन में बोलते हुए वाणिज्य और उद्योग विभाग के सचिव सुनील बर्थवाल ने भारत की उल्लेखनीय व्यापार-संचालित वृद्धि पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे खुली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जिसमें भारत के सकल घरेलू उत्पाद का 45.8 प्रतिशत अकेले व्यापार से आता है।”शिक्षा क्षेत्र में निवेश बढाने की जरूरत 1991-92 से अब तक यह संख्या काफी बढ़ी है, उस समय व्यापार सकल घरेलू उत्पाद का केवल 17.1 प्रतिशत था। बर्थवाल ने वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में भारत के बढ़ते एकीकरण और व्यापार में सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी बात की। वर्तमान में भारत के कुल निर्यात में सेवाओं का योगदान 43.8 प्रतिशत है, जो वैश्विक औसत 24.7 प्रतिशत से कहीं अधिक है। सेवा क्षेत्र में सालाना 7 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि के साथ, बर्थवाल ने अनुमान लगाया कि निकट भविष्य में भारत के व्यापार में इसकी हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक हो जाएगी। उन्होंने शिक्षा में अधिक निवेश की आवश्यकता पर बल दिया।
