‘रीथिंकिंग इयरली अप्रूवल एंड एफिलिएशन’ की थीम पर वेबिनार

Webinar on the theme of ‘Rethinking Annual Approval and Affiliation’

नई दिल्ली. देश में शिक्षा के क्षेत्र में एक अग्रणी थिंक टैंक सेंटर फॉर एजुकेशन ग्रोथ एंड रिसर्च (सीईजीआर) ने  रीथिंकिंग इयरली अप्रूवल एंड एफिलिएशन पर वेबिनार किया. जिसमें देश भर से वाईस चांसलर और शिक्षाविदों ने भाग लिया.  वेबिनार में एएएफटी यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. संदीप मारवाह, एएसएम ग्रुप  ऑफ़ इंस्टीटूशन्स के चेयरमैन डॉ. संदीप पचपांडे,  आईएसबीआर ग्रुप ऑफ़ इंस्टीटूट्स के फाउंडर एंड एमडी डॉ. मनीष कोठरी, ग्लोबल  इंस्टिट्यूट  ऑफ़  फार्मास्यूटिकल  एजुकेशन  एंड  रिसर्च , काशीपुर के  चेयरमैन प्रोफसर अनिल  कुमार सक्सेना, लॉयड ग्रुप ऑफ़ इंस्टीटूशन्स की ग्रुप डायरेक्टर डॉ. वंदना सेठी अरोड़ा, चन्द्रगुप्त इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट, पटना के डायरेक्टर डॉ. राणा सिंह, आईटीएस, गाजियाबाद के डायरेक्टर डॉ. अजय कुमार और सेंटर फॉर एजुकेशन ग्रोथ एंड रिसर्च (सीईजीआर) के डायरेक्टर रविश रोशन समेत कई चांसलर, वाइस चांसलर और शिक्षाविदों ने भाग लिया.  वेबिनार की शुरुआत अपने स्वागत सन्देश के साथ किया सीईजीआर के डायरेक्टर रविश रोशन ने किया.

वेबिनार में बोलते हुए एएएफटी यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. संदीप मारवाह ने कहा कि रीथिंकिंग इयरली अप्रूवल एंड एफिलिएशन जटील लेकिन महत्वपूर्ण विषय है. शिक्षा के क्षेत्र में हमारे देश में भी अप्रूवल प्रोसेस को वेस्टर्न कंट्री की तरह सरल और आसान होना चाहिए. रीथिंकिंग इयरली अप्रूवल एंड एफिलिएशन पर बोलते हुए लॉयड ग्रुप ऑफ़ इंस्टीटूशन्स की ग्रुप डायरेक्टर डॉ. वंदना सेठी अरोड़ा ने कहा कि अप्रूवल प्रोसेस ऐसा होना चाहिए जिससे कॉलेज का समय न बर्बाद हो. सिंगल विंडो सिस्टम में काम होना चाहिए ताकि संस्थान का समय रिसर्च वर्क और पठन –पाठन में जाए. जैसे सीबीएसई में पांच साल का अप्रूवल प्रोसेस होता है, वैसे ही हायर एजुकेशन में भी समय मिलना चाहिए. आईएसबीआर ग्रुप ऑफ़ इंस्टीटूट्स के फाउंडर एंड एमडी डॉ. मनीष कोठरी ने वेबिनार में बोलते हुए कहा कि रीथिंकिंग इयरली अप्रूवल एंड एफिलिएशन एक रोचक विषय है और इस पर अभी बहुत काम करने की जरुरत है. हायर एजुकेशन के लिए वेस्टर्न कंट्री में अप्रूवल प्रोसेस के लिए बहुत अच्छी वयवस्था है जहां अमेरिका में 5 से 6 साल, कनाडा में 5 से 6 साल, ऑस्ट्रेलिया में 6 से 7 साल समय दिया जाता है, भारत में भी ऐसे वयवस्था होनी चाहिए. वेबिनार को मॉडरेट  सीईजीआर के डायरेक्टर रविश रोशन ने किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट ने फार्मेसी कौंसिल ऑफ़ इंडिया के अगेंस्ट अपना फैसला दिया था, जिसमें कहा गया फार्मेसी कॉलेज को हर साल अप्रूवल प्रोसेस की जरुरत नहीं है. संस्थान को अपने करिकुलम को एक्सक्लूसिव बनाने की जरुरत है न कि हर साल अप्रूवल प्रोसेस में समय जाया करने की.

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