दिल्ली में हुआ शिक्षा को लेकर मंथन, देश के बड़े शिक्षाविद हुए शामिल

Brainstorming took place in Delhi regarding education, leading educationists of the country participated.

सीईजीआर ने किया ‘थर्ड समिट ऑन विजन 2047 इन एजुकेशन’ थीम पर समिट का आयोजन


नई दिल्ली. देश में शिक्षा के क्षेत्र में एक अग्रणी थिंक टैंक सेंटर फॉर एजुकेशन ग्रोथ एंड रिसर्च (सीईजीआर) ने नई दिल्ली में ‘थर्ड समिट ऑन विजन 2047 इन एजुकेशन’ थीम पर समिट का आयोजन किया. सीईजीआर दिल्ली समेत देशभर में नियमित रूप से शिक्षा, कौशल विकास और अनुसंधान से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर समिट, कांफ्रेंस एंड वेबिनार का सफल आयोजन करता है और विभिन्न स्टेकहोल्डर्स को सिफारिशें भेजता है. समिट में भारत को विकसित बनाने के विजन 2047 पर बोलते हुए एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रोफेसर टी जी सीताराम ने कहा कि भारत में पारिस्थितिकी तंत्र और गुणवत्ता के साथ-साथ इंजीनियरिंग और प्रबंधन स्नातकों की संख्या है और हम लगभग वहां हैं जहां हमें होना चाहिए. हालांकि इसे छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ उच्च शिक्षा को फिर से डिजाइन करने के लिए कुछ प्रयास करने की आवश्यकता है, जहां लचीलापन, नवाचार और रोजगार संस्कृति का हिस्सा हैं. उन्होंने कहा कि हम इस विघटनकारी युग में हैं, जहां कौशल, अपस्किलिंग और रीस्किलिंग एक निरंतर प्रोफेसर है और वास्तव में हमें जीवन भर सीखने के लिए खुद को तैयार करना चाहिए. प्रोफेसर टी जी सीताराम ने यह भी उल्लेख किया कि कैसे देश के 95 कॉलेज क्षेत्रीय भाषाओं में पाठ्यक्रम प्रदान कर रहे हैं और उन्होंने नोएडा के एक कॉलेज में हिंदी इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम की सफलता के बारे में बात की. उन्होंने कहा कि भारतीय छात्र को अपनी भाषा का विकल्प दें, अंग्रेजी कौशल सहित उनके समग्र विकास की गति देखें. एआईसीटीई ने 13 भाषाओं में पाँच धाराओं के लिए अनुवादित पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई हैं और ये वीडियो व्याख्यान और अन्य संसाधनों के लिए क्यू. आर. कोड के साथ अच्छी तरह से लिखी गई हैं. इस समिट में देश भर से आए जाने माने शिक्षाविद भाग लिया. समिट में एनएएसी, एनबीए एंड एनईटीएफ के चेयरमैन प्रोफेसर अनिल डी सहस्रबुद्धे, एआईसीटीई के चेयरमैन प्रोफेसर टी.जी सीताराम, सीईजीआर के नेशनल प्रेसिडेंट पद्मश्री प्रोफेसर जी.डी यादव, एआईसीटीई के एडवाइजर व सीईजीआर के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट डॉ. रमेश उन्नीकृष्णन, मीडिया एंड स्किल काउंसिल के सीईओ मोहित सोनी, मेंटर सीईजीआर एंड साउथ एशियन यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट के.के अग्रवाल, मेंटर सीईजीआर व शोभित यूनिवर्सिटी के चांसलर कुंवर शेखर विजेंद्र, एएसएम ग्रुप ऑफ़ इंस्टीटूट्स के चेयरमैन डॉ. संदीप पचपांडे समेत कई शिक्षाविदों ने अपना-अपना वक्तव्य रखा. समिट में सीईजीआर के नेशनल प्रेसिडेंट पद्मश्री प्रोफेसर जी.डी यादव ने बोलते हुए कहा कि शिक्षा राष्ट्र की उन्नति की आधारशिला है. हमारा दृढ़ विश्वास है कि बेहतर शिक्षा के दम पर ही हम विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करेंगे. निस्संदेह इस यात्रा में शिक्षा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. साल 2047 तक भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष मनाएगा. हमें एक ऐसी शिक्षा प्रणाली की कल्पना करनी चाहिए जो सभी भारतीयों को सशक्त बनाए, समावेशी विकास को बढ़ावा दे और हमें 21वीं सदी की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करे. समिट में एनएएसी, एनबीए एंड एनईटीएफ के चेयरमैन प्रोफेसर अनिल डी सहस्रबुद्धे ने कहा कि साल 2047 तक एक गतिशील और सशक्त भारत को विकसित आकार देने के लिए शिक्षा का एक अहम योगदान है. आज एजुकेशन का यूनिवर्सल एक्सेस होने की जरुरत है. भारत को सुलभ शिक्षण विकल्पों, लचीले विकल्पों, डिजिटल प्लेटफार्मों, स्थानीय भाषाओं और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लिए विशेष कार्यक्रमों को चलाने पर फोकस करना चाहिए. मेंटर सीईजीआर एंड साउथ एशियन यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट प्रोफ़ेसर के.के अग्रवाल ने कहा कि एजुकेशन में पुराने ट्रैंड को बदलना होगा और इस दिशा में देश मोदी सरकार अच्छा काम कर रही है. विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से 100 फीसदी सकल नामांकन अनुपात और साक्षरता दर हासिल करने की आवश्यकता है. समिट के आयोजन को लेकर सीईजीआर के डायरेक्टर रविश रोशन ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था को प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण बनाए रखने के लिए हम समय-समय पर इस तरह की पहल पिछले 12 सालों से कर रहें है. देश की युवा शक्ति को दिशा देने की जिम्मेदारी शिक्षाविदों पर है और उन्हें हम एक मंच पर ला रहे हैं. शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका व्यक्ति का विकास करना है, और केवल व्यक्ति के विकास के माध्यम से ही राष्ट्र का निर्माण होता है. समिट में बोलते हुए एएसएम ग्रुप ऑफ़ इंस्टीटूट्स के चेयरमैन डॉ. संदीप पचपांडे कहा कि साल 2047 तक एक गतिशील और सशक्त भारत को विकसित आकार देने के लिए देश में एंटरप्रेन्योरशिप को अभी और बढ़ावा देने की जरुरत है. उद्यमशीलता किसी भी राष्ट्र की उन्नति की आधारशिला है. हमारा दृढ़ विश्वास है कि बेहतर उद्यमशीलता के माहौल के दम पर ही हम विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल कर सकते है.

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