सीपीसीबी ने राज्यों से टायर पायरोलिसिस इकाइयों के लिए सख्त मानदंड लागू करने को कहा
CPCB asks states to impose strict norms for tyre pyrolysis units

नई दिल्ली, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने सभी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और समितियों से टायर पायरोलिसिस इकाइयों के संचालन के लिए संशोधित दिशा-निर्देशों का सख्ती से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा है।टायर पायरोलिसिस इकाई में पुराने टायरों का उच्च तापमान पर तापीय-रसायन पद्धति से पुनर्चक्रण करके औद्योगिक तेल और अन्य पदार्थ बनाये जाते हैं।यह तकनीक टायरों को जलाने या ऐसे ही छोड़ देने का विकल्प प्रदान करती है, जबकि अगर उचित सुरक्षा उपायों के साथ इसका संचालन नहीं किया जाता है तो यह पर्यावरणीय जोखिम पैदा करती है।सीपीसीबी ने पिछले साल जनवरी में टायर पायरोलिसिस इकाइयों के लिए संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया जारी की थी, जिसमें कहा गया कि केवल वे इकाइयां जो ‘‘एडवांस बैच ऑटोमैटिड प्रोसेस’’ (एबीएपी) का पालन करती हैं, उन्हें ही संचालन की अनुमति दी जाएगी।इसके 29 अप्रैल के नवीनतम आदेश के अनुसार केवल एबीएपी का उपयोग करने वाली और 60 टन प्रति दिन तक की संचयी बैच क्षमता वाली इकाइयों को ही एक ही परिसर में संचालन की अनुमति दी जाएगी।नई इकाइयों के मामले में, कुल क्षमता इस सीमा से अधिक नहीं हो सकती जब तक कि सभी बैच एक सतत प्रक्रिया के रूप में काम न करें।सीपीसीबी ने इस साल 19 जनवरी और 20 मार्च को राज्य बोर्ड और समितियों से संशोधित मानक संचालन प्रक्रियाओं का कार्यान्वयन शुरू करने को कहा था। हालांकि, कई राज्यों ने अभी तक अनुपालन रिपोर्ट पेश नहीं की है।राज्य प्रदूषण बोर्ड और समितियों को अब अपने अधिकार क्षेत्र में संचालित सभी टायर पायरोलिसिस इकाइयों के लिए संशोधित मानक संचालन प्रक्रियाओं का सख्त कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।
उन्हें तुरंत अनुपालन रिपोर्ट पेश करना का निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट में यह भी बताना होगा कि क्या ये इकाइयां एबीएपी-आधारित मानक संचालन प्रक्रिया का पालन कर रही हैं और क्या सीपीसीपी के पहले के पत्राचार के अनुसार कार्रवाई की गई है?
