उत्तर-पूर्वी राज्यों के ऊर्जा क्षेत्र को मिलेगी नई मजबूती, केंद्र ने सहयोग का दिया भरोसा
North-eastern states' energy sector will get new strength, Centre assures cooperation
नई दिल्ली। उत्तर-पूर्वी राज्यों में ऊर्जा क्षेत्र के विकास, बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाने और आधुनिक विद्युत अवसंरचना के विस्तार को लेकर केंद्र सरकार गंभीरता से काम कर रही है। इसी क्रम में आज श्रम शक्ति भवन में मेघालय के विद्युत मंत्री मेटबाह लिंगदोह, अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चोवना मीन तथा मिजोरम के विद्युत मंत्री एफ. रोडिंगलियाना के साथ ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में उत्तर-पूर्वी राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियों और वहां ऊर्जा क्षेत्र के सामने आने वाली चुनौतियों को विशेष रूप से ध्यान में रखा गया। पहाड़ी और दुर्गम इलाकों के कारण इन राज्यों में विद्युत ट्रांसमिशन एवं वितरण नेटवर्क का विस्तार अपेक्षाकृत चुनौतीपूर्ण रहता है। ऐसे में मजबूत और आधुनिक ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने पर चर्चा हुई।
बैठक का एक प्रमुख विषय Battery Energy Storage Systems (BESS) भी रहा। बढ़ती बिजली मांग और ग्रिड की विश्वसनीयता को देखते हुए ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को विकसित करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। BESS के माध्यम से बिजली की उपलब्धता और आपूर्ति व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के साथ-साथ ग्रिड को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा उत्तर-पूर्वी राज्यों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को अधिक सक्षम और भरोसेमंद बनाने के उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार के साथ वितरण प्रणाली को मजबूत करने और उपभोक्ताओं तक निर्बाध बिजली पहुंचाने पर जोर दिया गया।
बैठक में राज्यों को बिजली दरों का लागत के अनुरूप युक्तिसंगत निर्धारण करने की सलाह भी दी गई। इसके साथ ही Aggregate Technical and Commercial Losses (AT&C Losses) को कम करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया गया। बिजली वितरण कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ाने और वितरण नेटवर्क को सुदृढ़ करने को भी आवश्यक बताया गया।
AT&C Losses में कमी लाने से बिजली वितरण व्यवस्था की वित्तीय स्थिति बेहतर हो सकती है और इसका सीधा लाभ लंबे समय में उपभोक्ताओं तथा विद्युत क्षेत्र को मिल सकता है। इसके लिए तकनीकी सुधार, बेहतर मीटरिंग, वितरण नेटवर्क के आधुनिकीकरण और बिजली चोरी पर प्रभावी नियंत्रण जैसे कदम महत्वपूर्ण होंगे।
उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास न केवल स्थानीय बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक और औद्योगिक विकास के लिए भी इसकी अहम भूमिका है। पर्याप्त और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध होने से उद्योग, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है।
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि उत्तर-पूर्वी राज्यों में ऊर्जा क्षेत्र के विस्तार और आधुनिकीकरण को गति देने के लिए संबंधित राज्यों को हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। वित्तीय सहायता से लेकर तकनीकी सहयोग तक, आवश्यक जरूरतों के अनुसार राज्यों की मदद करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
बैठक से यह संकेत मिलता है कि उत्तर-पूर्वी राज्यों में बिजली व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क, ऊर्जा भंडारण, वितरण सुधार और वित्तीय स्थिरता पर एक साथ काम किया जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय से क्षेत्र में ऊर्जा अवसंरचना के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

