भीतर की साधना, बाहर का समर्पण: अहो गुरुदेव में पूज्य गुरुदेवश्री राकेशजी के जीवन और कार्य के छह दशकों का उत्सव

Inner Sadhana, External Dedication: Celebration of six decades of life and work of revered Gurudev Shri Rakeshji in Aho Gurudev

पूज्य गुरुदेवश्री राकेशजी की 60वीं जन्म-वर्षगांठ, सिर्फ एक जीवन का नहीं बल्कि उनसे बदले अनगिनत जीवन का उत्सव है

छह महाद्वीपों से संतों, दिग्गजों और साधकों का भव्य संगम; 60 ऐतिहासिक पहलों की घोषणा

मुंबई, 27 सितंबर 2026: जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर 25–26 सितंबर 2026 को पूरी दुनिया के लिए एक संगम स्थल बना, जब श्रीमद् राजचंद्र मिशन धरमपुर ने अहो गुरुदेव – 60 Years of an Enlightened Existence का आयोजन किया। इस समारोह ने मनाई पूज्य गुरुदेवश्री राकेशजी की 60वीं जन्म-वर्षगांठ, जो दुनिया भर में सम्मानित आध्यात्मिक गुरु, मानवसेवी और श्रीमद् राजचंद्रजी के परम भक्त हैं।  

यह, ऊपर से देखने में, 60वीं जन्म-वर्षगांठ का उत्सव था। लेकिन विशाल कन्वेंशन सेंटर के भीतर, यह अवसर ‘बड़े जन्मदिन’ की सामान्य भाषा और ढांचे से कहीं आगे लगता था। आध्यात्मिक गुरु, कॉर्पोरेट लीडर, परोपकारी, युवा स्वयंसेवक और दुनिया भर के 214 शहरों और 24 देशों से आए हजारों आध्यात्मिक साधक, सब एक ही स्थान से होकर गुजरे। 

इस दो दिवसीय आयोजन में पूज्य मोरारी बापू, पूज्य आनंदमूर्ति गुरुमां, स्वामी चिदानंद सरस्वतीजी, स्वामी स्वरूपानंदजी, बीके सिस्टर शिवानी, साध्वी भगवती सरस्वती और भिखु संघसेनाजी सहित कई आदरणीय संत शामिल हुए। अन्य विशिष्ट अतिथियों में मंगल प्रभात लोढ़ा, कैबिनेट मंत्री, महाराष्ट्र सरकार; पद्म विभूषण एन. आर. नारायण मूर्ति, संस्थापक एवं चेयरमैन एमेरिटस, इन्फोसिस; पद्म भूषण एन. चंद्रशेखरन, चेयरमैन, टाटा संस; लेफ्टिनेंट जनरल डी. एस. कुशवाह, PVSM, AVSM, SM, GOC, महाराष्ट्र, गुजरात एवं गोवा क्षेत्र; पद्म श्री हेमा मालिनी, सांसद (लोकसभा, मथुरा); पद्म भूषण दीपक पारेख, पूर्व चेयरमैन, HDFC; पद्म श्री दिलीप संघवी, संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक, सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज; पद्म श्री संजीव कपूर, कलिनरी आइकॉन एवं सह-संस्थापक, वंडरशेफ; मनोज मोदी, निदेशक, रिलायंस रिटेल एवं रिलायंस जियो; विनोद अडानी, प्रमोटर, अडानी ग्रुप; अशोक हिंदुजा, चेयरमैन, हिंदुजा ग्रुप; रणबीर कपूर, अभिनेता एवं निर्माता; सुधीर मेहता, चेयरमैन एमेरिटस, टोरेंट ग्रुप; सोनम कपूर आहूजा, अभिनेत्री एवं फैशन उद्यमी; नीलेश शाह, एमडी, कोटक महिंद्रा एएमसी; मोतीलाल ओसवाल, सह-संस्थापक, मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज; और मधुकर पारेख, चेयरमैन, पिडिलाइट इंडस्ट्रीज शामिल रहे।

एक खास पल था 60 नई पहलों की घोषणा, जो आध्यात्मिक और सेवा परियोजनाओं के बीच बराबर-बराबर बांटी गई थीं। सेवा परियोजनाओं की सूची में शामिल थे — श्रीमद् राजचंद्र सर्वमंगल कैंसर अस्पताल; सुरेंद्रनगर में श्रीमद् राजचंद्र सर्वमंगल अस्पताल और मेडिकल कॉलेज; श्रीमद् राजचंद्र मानसिक स्वास्थ्य पहल; 60 नए श्रीमद् राजचंद्र लव एंड केयर सेंटर्स; पूरे भारत में मल्टी-स्पेशियलिटी मेगा मेडिकल कैंप्स के साथ-साथ एनीमिया और विज़न केयर कैंप्स, जो 60 मिलियन लोगों तक पहुँचे; पशु देखभाल के लिए एक विशाल परिसर जिसमें 4 संस्थान शामिल हैं — श्रीमद् राजचंद्र एनिमल हॉस्पिटल, एनिमल शेल्टर, वेटरनरी साइंस इंस्टीट्यूट और धरमपुर में अहिंसा जागरूकता केंद्र, साथ ही मलाड में एक एनिमल हॉस्पिटल; श्रीमद् राजचंद्र दिशा — एक मुफ्त, एआई-आधारित करियर मार्गदर्शन मंच; मुंबई में विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए श्रीमद् राजचंद्र स्कूल; ग्रामीण भारत के लिए श्रीमद् राजचंद्र सर्वमंगल यूनिवर्सिटी; श्रीमद् राजचंद्र वनरोपण पहल और महिला सशक्तिकरण, समुदाय व पर्यावरण से जुड़ी कई अन्य पहलें। 

आध्यात्मिक उन्नति के लिए जिन परियोजनाओं का अनावरण किया गया उनमें शामिल हैं — मुंबई में आध्यात्मिक केंद्र; श्रीमद् राजचंद्र आश्रम में नई जगहें जैसे श्रीमद् राजचंद्र वेलनेस सेंटर; सॉलिट्यूड ग्रोव्स (एकांत कुटीर); श्रीमद् राजचंद्र म्यूज़ियम; दक्षिण अमेरिका में छह नए सत्संग केंद्र; पूज्य गुरुदेवश्री के प्रवचन, पुस्तकें और ध्यान दुनिया की 8 सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में, 60 पुस्तकें (दस भाषाओं में छह शीर्षक) और श्रीमद् राजचंद्रजी की महान कृति आत्मसिद्धि शास्त्र पर पूज्य गुरुदेवश्री की टीका 60 भाषाओं में; 60 भाषाओं में श्री आत्मसिद्धि शास्त्र; और BEYOND, पूज्य गुरुदेवश्री राकेशजी की एक विजुअल जीवनी।

इस आयोजन में पवित्र आत्मार्पित दीक्षा (संन्यास) समारोह भी हुआ, जिसमें ग्यारह युवा साधकों ने ब्रह्मचर्य व्रत लेकर अपना जीवन एक उच्च उद्देश्य को समर्पित किया। 26वीं की शाम, ‘अहो गुरुदेव’ नामक एक भव्य सांस्कृतिक श्रद्धांजलि में युवाओं की प्रस्तुतियों ने पूज्य गुरुदेवश्री राकेशजी के जीवन और कार्य को समर्पित भाव अर्पित किए। पूरे कार्यक्रम के दौरान, गुरुदेवश्री राकेशजी ने ‘सचेतन चयन’, ‘साहसपूर्वक त्याग’ और ‘करुणापूर्वक सेवा’ पर तीन प्रेरणादायी प्रवचन दिए।

चार वर्ष की आयु से ही, पूज्य गुरुदेवश्री राकेशजी ने अनगिनत साधकों को अपनी ओर खींचा है, एक ऐसी स्पष्टता से प्रभावित होकर जो मानो उनकी उम्र से कहीं आगे थी। छह दशकों बाद, वह शुरुआती आभा आज छह महाद्वीपों में फैली एक वैश्विक उपस्थिति बन चुकी है, जो लाखों जिंदगियों को छूती है — कम उम्र में ही जीवन का उद्देश्य खोज लेने वाले युवाओं से लेकर, उनके प्रवचन सुनने के लिए बोर्डरूम छोड़कर आने वाले कॉर्पोरेट लीडर्स तक; अफ्रीका के गांव की कक्षाओं से लेकर नया जीवन पाने वाले बचाए गए पशुओं तक; और अलग-अलग भाषाओं व संस्कृतियों के साधकों तक, जिन्हें सुकून और नई दृष्टि मिली। आध्यात्मिक जागृति और निरंतर मानवसेवा की यह शक्ति ही इस उत्सव को उनकी दृष्टि से बदले गए जीवन का उत्सव बनाती है।

इस आयोजन में एक भव्य समारोह की शान थी, लेकिन इसका असली केंद्र कहीं और था — इस विचार में कि आध्यात्मिकता को कर्म में बदलना चाहिए। मुंबई में हुए इस पहले आयोजन के बाद, यह उत्सव पूरे भारत में और फिर विदेशों में — दुबई और लंदन से लेकर टोरंटो और अमेरिका के कई शहरों तक — आयोजित किया जाएगा।

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