जेनसोल के खिलाफ कॉर्पोरेट मंत्रालय की जांच शुरू
Corporate Ministry begins probe against Gensol

नई दिल्ली, मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स (एमसीए) ने जेनसोल इंजीनियरिंग के खिलाफ सुओ मोटो जांच शुरू की है। सेबी के कंपनी के प्रमोटर्स पर बैन लगाने के बाद मंत्रालय ने ये जांच आगे बढ़ाई। कंपनी पर आरोप है कि उसने 975 करोड़ रुपए का बिजनेस लोन दुरुपयोग किया। जांच के तीन चैप्टरों में देखें इस मामले का सच।
चैप्टर-1: संकट: जेनसोल के शेयरों में हेरा-फेरी के साथ सेबी ने जून 2024 में जांच शुरू की। जांच में पाया गया कि कंपनी ने फंड का डायवर्जन किया और प्रमोटर्स ने कंपनी को अपनी प्रॉपर्टी समझ लिया था। यह चाहे फंड रिलेटेड पार्टीज में घुमाना था या व्यक्तिगत खर्चों में इस्तेमाल किया गया था।
चैप्टर-2: हेराफेरी: कंपनी ने 977.75 करोड़ रुपए का टर्म लोन लिया और ईवी खरीदने का इंतजाम किया था। लेकिन फरवरी 2025 तक केवल 4,704 व्हीकल ही खरीदे जा सके। सेबी ने पाया कि जब भी फंड कंपनी से गो-ऑटो में ट्रांसफर किया गया, तो अधिकांश फंड अन्य संबंधित पक्षों को ट्रांसफर किए गए।
चैप्टर-3: शुरुआत: जेनसोल की शुरुआत 2012 में हुई थी और इसने सोलर ईपीसी, ईवी लीजिंग, और ईवी मैन्युफैक्चरिंग के सेगमेंट्स में काम किया। 2022 से 2024 के बीच शेयर में 2600 फीसदी तक की चढ़ाव देखी गई।
