खिलौना उद्योग में चीन को पछाड़ नया खिलाड़ी बना भारत: आईसीसीआई
India becomes new player in toy industry by defeating China: ICCI
चीन को छोड़ भारत पर ध्यान दे रहीं ग्लोबल खिलौना कंपनियां, अब 60 फीसदी उत्पाद किए जा रहे निर्यात

नई दिल्ली. भारत के खिलौना उद्योग ने वित्त वर्ष 2015 में वित्त वर्ष 2023 के बीच तेजी से आगे बढ़ा है. इस बीच में निर्यात में 239 फीसदी की भारी वृद्धि हुई, वहीं आयात में 52 फीसदी तक की गिरावट आई. इस पर इंटीग्रेटेड चैम्बर्स ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (आईसीसीआई) के डायरेक्टर नीरज कुमार मिश्रा कहते है कि भारत में खिलौना मैन्युफैक्चरिंग काफी तेजी से बढ़ा है. खिलौना मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में जो बातें चीन के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं वो हमारे लिए फायदेमंद हो रहा है. भारत में खिलौना उद्योग में एक्सपोर्ट बढ़ने के कारण देश आज खिलौने का शुद्ध निर्यातक बन गया. आपको को बता दें भारत में खिलौने की बिक्री के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) की मंजूरी जरूरी होना, संरक्षणवाद, चीन-प्लस-वन रणनीति और मूल सीमा शुल्क बढ़ाकर 70 फीसदी किए जाने से देश के खिलौना कारोबार में तेजी आई है. आज हैस्ब्रो, मैटल, स्पिन मास्टर और अर्ली लर्निंग सेंटर जैसे ग्लोबल ब्रांड आपूर्ति के लिए देश पर अधिक निर्भर हैं. कई बड़े ग्लोबल ब्रांड अब अपना ध्यान चीन की अपेक्षा भारत पर केंद्रित कर रहीं हैं. डायरेक्टर आईसीसीआई कहते हैं कि भारत में बीआईएस के नियमन से पहले खिलौने के लिए हम 80 फीसदी तक चीन पर निर्भर हुआ करते थे, जो आज बहुत कम हो गई है. अब आयात पर घरेलू भारतीय उत्पादों का दबदबा है. वहीं आज कई कंपनियां भारत में अपना आधार तैयार प्लांट लगा रही हैं. खिलौना मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों द्वारा उत्पादित करीब 60 फीसदी उत्पाद अब निर्यात बाजारों की जरूरतें पूरी कर रहे हैं. जिसमे अमेरिका के साथ ही यूरोप के 33 देश शामिल हैं.
