जयशंकर ने लाओस में रूसी विदेश मंत्री लावरोव और अन्य देशों के समकक्षों से मुलाकात की
Jaishankar meets Russian Foreign Minister Lavrov and counterparts from other countries in Laos
वियनतियाने (लाओस),विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को रूस के अपने समकक्ष सर्गेई लावरोव और ब्रुनेई, न्यूजीलैंड और लाओस के अन्य नेताओं से मुलाकात की और शिक्षा तथा कृषि प्रौद्योगिकी समेत द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।जयशंकर दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) की बैठकों में शामिल होने के लिए लाओस पीपुल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक की राजधानी में हैं।उन्होंने बैठक के दौरान रूस के विदेश मंत्री लावरोव से मुलाकात की।रूसी विदेश मंत्रालय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने आसियान कार्यक्रम के इतर मुलाकात की।’’जयशंकर ने ब्रुनेई और न्यूजीलैंड के अपने समकक्षों के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें कीं और शिक्षा तथा कृषि प्रौद्योगिकी सहित द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।उन्होंने न्यूजीलैंड के अपने समकक्ष और देश के उप प्रधानमंत्री विंस्टन पीटर्स के साथ द्विपक्षीय बैठक की।जयशंकर ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “न्यूजीलैंड के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स से मिलकर मुझे हमेशा खुशी होती है। शिक्षा, कृषि प्रौद्योगिकी, प्रशांत द्वीप समूह और क्रिकेट पर चर्चा हुई।”जयशंकर ने ब्रुनेई के अपने समकक्ष दातो हाजी एरीवान के साथ भी बैठक की।दोनों नेताओं ने भारत और ब्रुनेई के बीच राजनयिक संबंधों के 40 वर्ष पूरे होने के मौके पर ‘लोगो’ जारी किया।जयशंकर ने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि हमारे मधुर एवं मैत्रीपूर्ण संबंध और भी प्रगाढ़ होंगे।’’उन्होंने लाओस के गृह मंत्री विलायवो एनजी बौड्डखम, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री मलाइथोंग कोमासिथ, विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष सन्या प्रसुथ और विशेष दूत अलौंकियो किट्टीखौन से भी मुलाकात की।जयशंकर ने कहा, “हमारी मेजबानी के लिए राजदूत प्रशांत अग्रवाल को धन्यवाद।’’जयशंकर आसियान-भारत, पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (ईएएस) और आसियान क्षेत्रीय मंच (एआरएफ) के प्रारूप में आसियान ढांचे के तहत विदेश मंत्रियों की बैठकों में शामिल होने के लिए लाओस की राजधानी में हैं, ताकि इस समूह के साथ भारत के संबंधों को और गहरा किया जा सके।
उनकी यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ का एक दशक पूरा हो रहा है।
