विधेयकों के नामों के जरिए हिंदी थोपने के कुछ विपक्षी सदस्यों के आरोपों को मंत्री नायडू ने किया खारिज

Minister Naidu rejected the allegations of some opposition members of imposing Hindi through the names of the bills

 

 

 

नई दिल्ली, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने ‘भारतीय वायुयान विधेयक, 2024’ के हिंदी नाम को लेकर कुछ विपक्षी सांसदों की आपत्ति और हिंदी थोपने के उनके आरोपों को खारिज करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि यह भारत की विरासत व संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए किया गया है तथा इसमें संवैधानिक नियमों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है।राज्यसभा में विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए नायडू ने कहा, ‘‘हम भारत के विभिन्न असली रंगों को दिखाना चाहते हैं और इसका हिंदी में जो नाम रखा गया है… वायुयान विधेयक… यह उसी का एक छोटा सा संकेत है। विधेयक की विषय वस्तु अंग्रेजी में है लिहाजा इसमें किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए।’’उल्लेखनीय है कि विधेयक पर चर्चा के दौरान इसका शीर्षक अंग्रेजी से हिंदी किए जाने पर कई सदस्यों ने आपत्ति जताई थी और सरकार पर हिंदी थोपने का आरोप लगाया था।तृणमूल कांग्रेस की सदस्य सागरिका घोष ने कहा कि सरकार को नाम बदलने का ‘बहुत शौक’ है। उन्होंने कहा कि पहले भारतीय दंड संहिता (इंडियन पीनल कोड) का नाम बदल कर भारतीय न्याय संहिता किया गया और अब विमान अधिनियम (एयरक्राफ्ट एक्ट) का नाम बदलकर भारतीय वायुयान अधिनियम किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘यह सरकार गेम चेंजर नहीं बल्कि नेम चेंजर सरकार है।’’घोष ने सरकार पर हर जगह हिंदी थोपने का आरोप मढ़ा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार पुराने कानूनों को बदल रही है लेकिन वह इस विधेयक में नागरिकों की सुरक्षा के बारे में मौन है।उन्होंने पूछा, ‘‘ऐसे में कानून बदलने का क्या मतलब होगा?’’द्रमुक सदस्य कनिमोझी एनवीएन शोमू ने विधेयक के शीर्षक का संदर्भ देते हुए कहा कि सरकार को उन लोगों पर हिंदी नहीं थोपनी चाहिए जो इस भाषा को नहीं बोलते हैं।इन आरोपों का जवाब देते हुए नायडू ने कहा कि शुरुआत में विधेयक के नाम का उच्चारण हिंदी में करना मुश्किल होगा, लेकिन धीरे-धीरे सभी को इसकी आदत हो जाएगी।उन्होंने अपने नाम किंजरापु राममोहन नायडू का उदाहरण दिया और कहा कि इसके उच्चारण में यदि किसी को कुछ परेशानी हो तो इसका मतलब यह नहीं है कि इस वजह से वह अपना नाम बदल लें, क्योंकि दूसरों का इससे आसानी हो जाएगी।नायडू ने कहा, ‘‘मैं अपने नाम को बदल दूं, यह नहीं हो सकता। क्योंकि यही मेरी पहचान है। इस तरह अभी शायद दो बार, तीन बार वायुयान बोलने में मुश्किल होगी लेकिन भारत में हर चीज की आदत पड़ जाती है। लोगों को धीरे-धीरे इसकी आदत पड़ जाएगी।’’उन्होंने कहा कि विधेयक का नाम भारतीय वायुयान विधेयक रखना भारतीय भाषाओं की पहचान को बनाए रखने का प्रयास भी है।उन्होंने कहा कि वायुयान वास्तव में एक संस्कृत शब्द है।उन्होंने कहा कि विपक्ष के साथी सही मायने में भाषा और संस्कृति की सराहना करना चाहते हैं तो उन्हें सरकार के उस फैसले की सराहना करनी चाहिए जिसमें पांच भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया।नायडू ने कहा कि मौजूदा सरकार ने भारतीय भाषाओं को कैसे प्रोत्साहित किया है, इसका एक उदाहरण हाल में संविधान दिवस के अवसर पर मैथिली और और संस्कृत में संविधान की प्रति जारी किया जाना भी है।

 

 

 

 

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