जलियांवाला बाग नरसंहार की पुण्यतिथि पर एक शाम शहीदों के नाम प्रांतीय विचार संगोष्ठी का आयोजन।

Organising a provincial seminar in the name of martyrs on the death anniversary of Jallianwala Bagh massacre.

शहीद देश की पहचान है राष्ट्रीय अस्मिता और पहचान को नहीं भूलना चाहिए- प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान

श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय एवं भारतीय इतिहास संकलन समिति, हरियाणा प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को जलियांवाला बाग नरसंहार की पुण्यतिथि पर एक शाम शहीदों के नाम विषय पर प्रांतीय विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ गणमान्य अतिथियों द्वारा मां भारती के चरणों में पुष्प अर्पित कर और जलियांवाला बाग कांड में शहीद हुए लोगों को याद कर किया गया। मुख्य वक्ता इतिहास संकलन योजना के उत्तर क्षेत्र के संगठन मंत्री एवं चंडीगढ़ राजकीय महाविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर प्रशांत गौरव रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने की। मुख्य वक्ता डॉ. प्रशांत गौरव ने श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि जलियांवाला बाग हत्याकांड को भले ही वर्षों बीत गए हों मगर अंग्रेजी हुकूमत की खौफनाक कार्रवाई को याद कर आज भी रूह कांप उठती है। 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी का वो दिन जब अमृतसर के जलियांवाला बाग में अंग्रेजी सरकार द्वारा लागू किए गए रोलेट एक्ट कानून का विरोध करने के लिए एक शांतिपूर्ण सभा का आयोजन किया गया था। उस समय अंग्रेज ऑफिसर जनरल डायर ने बिना किसी कारण उस सभा में उपस्थित लोगों पर अंधाधुंध गोली चलवा दी। इस घटना में 400 से अधिक लोग मारे गए और 2000 से अधिक लोग घायल हुए थे। उन्होंने कहा जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरुद्ध फलस्वरूप ही भारतवर्ष के लोगों में स्वतंत्रता प्राप्ति को लेकर लहर दौड़ पड़ी और आखिरकार अंग्रेजों को भारत छोड़कर भागना पड़ा। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि भारतीय इतिहास गौरवमई और विजय गाथाओं से भरा पड़ा है। देश के स्वतंत्रता सेनानियों के अदम्य साहस और वीरता की बदौलत ही आज पूरा देश स्वतंत्रता पूर्व और खुशहाली का जीवन व्यतीत कर रहा है। शहीद देश की पहचान है राष्ट्रीय अस्मिता और पहचान को नहीं भूलना चाहिए। शहीदों को याद करने का मतलब केवल पिछली घटनाओं को याद करना मात्र नहीं है बल्कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से शहीदों के उत्कृष्ट गुणों जैसे विश्वास, धर्मपरायणता, शहादत, बहादुरी और बलिदानी गाथाओं को युवा पीढ़ी को स्थानांतरित करना है। कार्यक्रम के अंत में विशिष्ट अतिथि एवं आयुष विवि के कुलसचिव डॉ. नरेश भार्गव ने कहा कि युवा पीढ़ी को देश के स्वतंत्रता सेनानियों प्रेरणा लेकर ही जीवन में आगे बढ़ना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में भारतीय इतिहास संकलन समिति के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. रमेश धारीवाल ने उपस्थित गणमान्यों और कार्यक्रम की आयोजक टीम का धन्यवाद प्रकट किया। इस अवसर पर हरियाणा प्रांत इतिहास संकलन समिति के प्रांतीय महासचिव, डॉ. सुरेंद्र कुमार, प्रांत युवा इतिहासकार प्रमुख डॉ. धीरज कौशिक, प्राचार्य डॉ. देवेंद्र खुराना सुरेंद्र लाल धीमान, हरजीत सिंह संधू, कुलदीप चंद, योगेशवर शर्मा, डॉ. सुधीर मलिक, डॉ. लसीठा और अधीक्षक अरविंद कुमार मौजूद रहे।

 

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