पांच राज्यों के नतीजों ने बदली सियासत की दिशा

The results of five states changed the direction of politics


पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे केवल सरकारों के गठन का मामला भर नहीं हैं, बल्कि ये देश की बदलती राजनीतिक धारा का स्पष्ट संकेत भी हैं। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन, असम में निरंतरता, केरल में बदलाव और तमिलनाडु-पुडुचेरी में नए समीकरण—इन सभी परिणामों ने मिलकर यह तय कर दिया है कि आने वाले वर्षों में भारतीय राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी। सबसे बड़ा संदेश पश्चिम बंगाल से आया है, जहां लंबे समय से जमी सत्ता को मतदाताओं ने बदलने का निर्णय लिया। यह बदलाव केवल एक राज्य तक सीमित नहीं, बल्कि उस मानसिकता को दर्शाता है जिसमें मतदाता अब स्थिरता के साथ-साथ निर्णायक नेतृत्व और स्पष्ट नीतियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। असम में सत्ता की वापसी यह बताती है कि यदि शासन में निरंतरता और विकास का भरोसा बना रहे, तो जनता उसे दोहराने में संकोच नहीं करती।

केरल में सत्ता परिवर्तन और वहां सहयोगी दलों की भूमिका यह दर्शाती है कि गठबंधन राजनीति अभी भी प्रासंगिक है, लेकिन उसका आधार अब केवल परंपरागत समीकरण नहीं, बल्कि प्रदर्शन और भरोसे पर टिक रहा है। तमिलनाडु और पुडुचेरी में बदले समीकरण यह संकेत देते हैं कि दक्षिण भारत की राजनीति भी अब नए प्रयोगों और विकल्पों के लिए तैयार है। इन चुनाव परिणामों का सबसे व्यापक प्रभाव राष्ट्रीय स्तर पर दिखता है। यह जनादेश उस नेतृत्व के प्रति बढ़ते विश्वास को रेखांकित करता है, जिसने पिछले एक दशक में अपनी राजनीतिक पहुंच को निरंतर विस्तार दिया है। निस्संदेह, इन नतीजों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को और मजबूत किया है। यह स्पष्ट हो रहा है कि उनका राजनीतिक प्रभाव अब केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश में गहराई तक स्थापित हो चुका है।

यही कारण है कि इन चुनावों को 2027 और 2029 के लिहाज से  सेमीफाइनल” के रूप में देखा जा रहा है। मतदाताओं का रुझान यह संकेत देता है कि यदि यही प्रवृत्ति बनी रही, तो आगामी लोकसभा चुनाव में भी इसी प्रकार का प्रभाव देखने को मिल सकता है। अंततः, यह कहा जा सकता है कि 2026 का यह जनादेश केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि एक राजनीतिक प्रवाह का उदय है—एक ऐसा प्रवाह, जो फिलहाल रुकता हुआ नहीं दिखता। भारतीय राजनीति की दिशा और दशा दोनों को बदलने का संकेत दे दिया है। 2026 के इस जनादेश में जहां एक ओर भाजपा का विस्तार दिखा, वहीं केरल में मुस्लिम लीग जैसी क्षेत्रीय सहयोगी पार्टियों की निर्णायक भूमिका भी उभरकर सामने आई। यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि गठबंधन राजनीति के नए समीकरण भी तय कर रहा है। यह जश्न केवल चुनावी जीत का प्रतीक नहीं था, बल्कि एक नई राजनीतिक दिशा, नए संकल्प और जनविश्वास की अभिव्यक्ति भी था। बंगाल से केरल तक बदले समीकरण, यह सिर्फ चुनाव नहीं—राष्ट्रीय राजनीति का निर्णायक मोड़ है।
बता दें कि चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के नतीजों के मुताबिक, भाजपा अब जिन 21 राज्यों में शासन कर रही है, अगर उनका कुल क्षेत्रफल निकालें तो यह देश का करीब 72 फीसदी है। वहीं, आबादी के मामले में भाजपा इस वक्त भारत की 76 फीसदी आबादी पर शासन कर रही है। भाजपा मौजूदा समय में जिन 21 राज्यों में शासन कर रही है, उनमें सबसे बड़ा राज्य राजस्थान है, जिसका क्षेत्रफल देश के कुल क्षेत्रफल का 10.40 प्रतिशत है। वहीं, सबसे छोटा पुदुचेरी है, जिसका क्षेत्रफल देश का 0.01 फीसदी है।
इसके अलावा आबादी के लिहाज से भाजपा के शासन वाला सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश है, जिसके पास देश में 16.50 फीसदी आबादी है। वहीं, सबसे छोटा पुदुचेरी है, जिसकी आबादी देश की 0.10 फीसदी है।
खास बात यह है कि मई 2014 में नरेंद्र मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली थी। उनके सत्ता में आने के समय देश के सात राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगी दल सरकार चला रहे थे। इनमें पांच राज्यों में भाजपा के मुख्यमंत्री थे, जबकि आंध्र प्रदेश और पंजाब में उसकी सहयोगी पार्टी सत्ता में थी। इन दो राज्यों में देश की छह फीसदी से ज्यादा आबादी रहती है। बाकी पांच राज्यों छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भाजपा के मुख्यमंत्री थे। इन राज्यों में देश की 19 फीसदी से ज्यादा आबादी रहती है।
यानी, जब नरेंद्र मोदी देश की सत्ता में आए उस वक्त करीब 26 फीसदी आबादी पर भाजपा और उसकी सहयोगी सरकारें चल रही थीं। उस वक्त देश के 14 राज्यों में कांग्रेस और उसके सहयोगी पार्टियों की सरकार थी। कांग्रेस शासित इन राज्यों में देश की 37 फीसदी से ज्यादा आबादी रहती है। इन राज्यों में महाराष्ट्र, कर्नाटक जैसे बड़े राज्य शामिल थे। 2014 में सात राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकार थी। चार साल बाद मार्च 2018 में 21 राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकार थी। इन राज्यों में देश की करीब 71 फीसदी आबादी रहती है। ये वो दौर था, जब भाजपा शासन आबादी के लिहाज से पीक पर था। वहीं, चार राज्यों में कांग्रेस की सरकार थी। इन राज्यों की सात फीसदी आबादी रहती है। अब पश्चिम बंगाल, आसाम और पॉडिचेरी में सीधे भाजपा की सरकार बनने जा र ही है। इसके साथ ही खाते में 3 राज्य और जुड जाएंगे।

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