जस्टिस वर्मा के खिलाफ मकदमे का आदेश देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
Supreme Court refuses to order prosecution against Justice Verma

नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट के जज रहे जस्टिस यशवंत वर्मा के घर से भारी मात्रा में नकदी बरामद होने के मामले में उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने का आदेश देने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं से जस्टिस वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर पहले राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को प्रतिवेदन देने का सुझाव दिया। कहा कि यदि वहां कार्रवाई नहीं होती है तो वे दोबारा से इस अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। इसके साथ ही जस्टिस अभय एस. ओका और उज्जल भुइयां की पीठ ने याचिका खारिज कर दी। इससे पहले, पीठ ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) पहले ही आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट और जस्टिस वर्मा के जवाब राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेज चुके हैं।
मामले में आगे की कार्रवाई अब उनके समक्ष लंबित है। पीठ ने कहा कि चूंकि आपने (याचिकाकर्ताओं) राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के समक्ष कार्रवाई की मांग करते हुए कोई प्रतिवेदन दायर नहीं किया है, इसलिए हम परमादेश जारी करने की मांग वाली इस याचिका पर विचार नहीं कर सकते। शीर्ष अदालत ने कहा है कि जहां तक अन्य मांगे हैं, जैसे कि आंतरिक जांच प्रक्रिया निर्धारित करने वाले के. वीरस्वामी फैसले पर पुनर्विचार, आदि पर फिलहाल विचार की आवश्यकता नहीं है। अधिवक्ता मैथ्यूज नेदुम्परा और तीन अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इसमें उन्होंने जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास में 14 मार्च की रात लगी आग बुझाने के दौरान दिल्ली पुलिस और दमकलर्मियों को भारी मात्रा में नकदी मिलने के आरोपों में आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी। समिति की रिपोर्ट की जानकारी नहीं : जस्टिस ओका जस्टिस ओका ने कहा कि हम यह नहीं कह रहे हैं कि आप याचिका दाखिल नहीं कर सकते, लेकिन तथ्य यह है कि आप समिति के रिपोर्ट की विषय-वस्तु नहीं जानते हैं। उस रिपोर्ट में क्या है, इस बारे में हमें भी कोई जानकारी नहीं है, इसलिए आप एक प्रतिवेदन देकर उनसे कार्रवाई करने की मांग कर सकते हैं।
