डिब्रूगढ़ में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की तीन दिवसीय ” श्री हरि कथा ”  का शुभारंभ..

Three day long "Shri Hari Katha" of Divya Jyoti Jagrati Sansthan started in Dibrugarh.

डिब्रूगढ़ में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की तीन दि
जीवन में आनंद और शाश्वत सुख की प्राप्ति मात्र इसके स्रोत्र दिव्य शक्ति से जुड़कर ही मिल सकती है। गत 8 से आगामी 10 दिसंबर तक  डिब्रूगढ़ के कालीबाड़ी अंचल स्थित काली मंदिर में श्री  हरि कथा के माध्यम से शाश्वत आनंद अमृत की रसधार प्रवाहित की जा रही है। सर्व श्री आशुतोष महाराज जी ऐसे अनेक कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी बहुमूल्य कृपा जनमानस को प्रदान कर रहे हैं। सामाजिक-आध्यात्मिक और अलाभकारी संगठन, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान विश्व शांति व समाज कल्याण हेतु कटिबद्ध हो निरंतर प्रयासरत है।
गुरुदेव सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुषमा भारती जी ने श्री हरि कथा के प्रथम दिवस हनुमान जी के जीवन के अनेको प्रसंगो को सभी के समक्ष रखा। हनुमान जी, जो भगवान भी हैं और भक्त भी हैं। उनका चरित्र बड़ा ही दिव्य हैं। जो भक्त शिरोमणि है। साध्वी जी ने हनुमान जी और लंकिनी के प्रसंग को सभी समक्ष रखते हुए बताया कि भक्त हनुमान जी का लंकिनी को मुस्टिका प्रहार करना, वास्तविकता में सत्संग सुनाना था। लंकिनी  कहती हैं वाह तात आज आपने कितना अच्छा सत्संग सुनाया। गोस्वामी तुलसीदास जी राम चरित मानस में लिखते हैं –

 

तात स्वर्ग अपवर्ग सुख धरिय तुला एक अंक।

 तुल ना ताहि सकल मिली जो सुख लव सत्संग।।

“सत्संग अर्थात सत्य का संग। जहां एक जीवत्मा आपने परमात्मा का दर्शन करती हैं। अपने आराध्या से मिल लेती हैं। कथा ने उपस्थित श्रद्धालुओं को माँ की महिमा से परिचित करवा ईश्वर साक्षात्कार हेतु प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति ने आध्यात्मिक प्रगति, दैवीय कृपा और उत्साह का अनुभव किया। इस कथा में सुमधुर भजनों का गायन साध्वी सुश्री पदमप्रभा भारती जी तथा साध्वी सूश्री अभिनंदना भारती जी ने किया। मंच संचालन  साध्वी ममता भारती जी ने किया
 । इस प्रकार श्री हरि कथा का प्रथम दिवस बहुत ही सुंदर ढंग से संपन्न हुआ।

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