चीन ने बनाया नॉन न्यूक्लियर हाइड्रोजन बॉम्ब, परीक्षण से दुनिया में हड़कंप

12 people killed, 30 injured in US air strikes, Houthi rebels confirmed

 

 

 

बीजिंग, अमेरिका और चीन ट्रैरिफ वॉर को लेकर एक दूसरे पर लगातार हमले कर रहे हैं। टैरिफ वॉर से शुरू हुआ विवाद अब टेक्नोलॉजिकल और मिलिट्री पावर की होड़ तक पहुंच गया है। इस दौड़ में चीन ने जबरदस्त चाल चली है जिसने अमेरिका समेत दुनियाभर को हैरानी में डाल दिया है। चीन के नए नॉन न्यूक्लियर हाइड्रोजन बॉम्ब बना लिया है।चीनी वैज्ञानिकों ने नॉन न्यूक्लियर हाइड्रोजन बॉम्ब का सफल परीक्षण किया है। ये दिखने में बहुत छोटा है, लेकिन यह बहुत खतरनाक। बिना न्यूक्लियर मैटेरियल के ये बम अब अमेरिका को टेंशन देगा। सिर्फ दो किलो वजनी इस बम ने एक हजार डिग्री सेल्शियस की गर्मी वाला एक आग का गोला बना दिया वह भी महज 2 सेकेंड के अंदर। ये दिखने में छोटा लगे लेकिन इसका असर पारंपरिक विस्फोट से कहीं ज्यादा भयानक है।

टीएनटी जहां सिर्फ 1-2 सेकेंड में खत्म हो जाता है। वहीं ये हाइड्रोजन बम सेकेंडों तक जलता और फैलता है और अपने आसपास की हर चीज को तबाह कर देता है। इस बम को चीन के स्टेटशिप बिल्डिंग कॉरपोरेशन 705 रिसर्च इंस्टीत्यूट ने तैयार किया है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस डिवाइस में मैग्नीशियम-आधारित सॉलिड-स्टेट हाइड्रोजन स्टोरेज मटीरियल का इस्तेमाल किया गया है। वैज्ञानिकों ने बताया कि मानक विस्फोटकों द्वारा ट्रिगर किए जाने पर, पदार्थ तेजी से टूट जाता है और हाइड्रोजन गैस छोड़ता है। यह गैस फिर प्रज्वलित होती है, जिससे एक तीव्र और निरंतर ज्वाला निकली है। इस तरह के तंत्र का इस्तेमाल इसकी सघनता और ऊर्जा घनत्व के कारण उच्च ऊर्जा प्रणोदन प्रणालियों या उन्नत हथियारों में संभावित रूप से किया जा सकता है।चीनी वैज्ञानिकों का दावा है कि ये बम कम खर्च में कम रेडिएशन के जोखिमों के साथ ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। इसका सीधा मतलब है कि चीन अब परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किए बिना भी सुपर वेपन बना रहा है। चीन इस नए हथियार के जरिए कई निशाने एक साथ लगाने की कोशिश में है, जिससे ना तो किसी अंतरराष्ट्रीय संधि का उल्लंघन हो और ना ही दुश्मन पर बड़ा हमला करने के लिए विकल्पों की कमी रहे।माना जाता है कि शोधकर्ताओं ने इस उपकरण के सैन्य उपयोग का भी पता लगाया है, खासकर जब स्थिति की मांग हो कि एक बड़े क्षेत्र को तीव्र गर्मी से कवर किया जाए और उच्च-मूल्य वाले लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए इसकी शक्ति को केंद्रित किया जाए।  यह साफ नहीं हो सका कि परीक्षण में इस्तेमाल की गई बड़ी मात्रा में मैग्नीशियम हाइड्राइड कहाँ से आया। चीन ने शांक्सी में एक बड़ी फैक्ट्री तैयार की है जो हर साल 150 टन इस सामग्री का उत्पादन कर सकती है। चीनी विज्ञान अकादमी के मुताबिक फैक्ट्री में वन-पॉट सिंथेसिस नामक एक विशेष विधि का इस्तेमाल किया जाता है जो उत्पादन को सस्ता और सुरक्षित बनाती है।

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