ICCT इंडिया का अध्ययन: इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर से 84% तक घट सकता है डीजल का खर्च
ICCT India study: Electric tractors can reduce the cost of diesel by 84%
भारत का पहला ई-ट्रैक्टर पायलट अध्ययन: हरियाणा के 4 जिलों में 11 महीने चला परीक्षण, जिसमे जुताई से लेकर पराली प्रबंधन तक का विश्लेषण किया ।

चंडीगढ़ : इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (ICCT) द्वारा आज ‘अर्बन अड्डा 2026’ में जारी एक नए वास्तविक-प्रदर्शन पायलट अध्ययन के अनुसार, इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर डीजल ट्रैक्टरों की तुलना में उतने ही या उससे भी कम समय में खेत का काम पूरा कर सकते हैं, जबकि प्रति एकड़ ऊर्जा लागत में 64% से 84% तक की कटौती करते हैं।
भारत में अपनी तरह का यह पहला 11 महीने का अध्ययन, चार हरियाणा जिलों में चार निर्माताओं के पाँच ई-ट्रैक्टर मॉडलों पर आधारित था, जिसमें जुताई, बुवाई, फसल अवशेष प्रबंधन (पराली प्रबंधन) और परिवहन संचालन को शामिल किया गया। यह पायलट प्रोजेक्ट ई-ट्रैक्टर के वास्तविक प्रदर्शन पर मैदानी परीक्षण के प्रमाण तैयार करने वाले शुरुआती प्रयासों में से एक है—यह एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ अब तक के दावे वास्तविक कृषि परिस्थितियों के बजाय मुख्य रूप से निर्माताओं के विनिर्देशों (specs) पर ही निर्भर रहे हैं।”
अर्बन अड्डा में लॉन्च की गई यह स्टडी, जयेश रंजन, IAS, विशेष मुख्य सचिव, उद्योग एवं वाणिज्य, सूचना प्रौद्योगिकी, और शहरी एवं महानगरीय विकास, और डॉ. देबोलिना कुंडू, निदेशक, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स द्वारा जारी की गई है। यह अध्ययन ऐसे समय में आया है जब धान की कटाई शुरू हो रही है और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पराली जलाने का खतरा फिर से लौट आया है।
अध्ययन में पाया गया कि स्ट्रॉ बेलर चलाने वाला एक इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर डीजल ट्रैक्टर की तुलना में प्रति घंटे 17% अधिक बेल्स बनाता है, जबकि लगभग एक-तिहाई ऊर्जा का उपयोग करता है, जिससे फसल अवशेष प्रबंधन अधिक स्वच्छ, सस्ता और तेज हो जाता है। इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर दिल्ली की हवा के लिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि NCR में औद्योगिक ढुलाई के लिए डीजल ट्रैक्टरों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है, और भारत के वर्तमान उत्सर्जन नियमों के तहत एक नया 25-50 HP ट्रैक्टर एक ट्रक के लिए अनुमत कण प्रदूषण से लगभग 60 गुना अधिक उत्सर्जन कर सकता है, और 2032 से पहले सख्त मानकों की उम्मीद नहीं है।
“भारत ने ऑन-रोड (सड़क पर चलने वाले) वाहनों के विद्युतीकरण पर तेज़ी से काम किया है, और उस गति को अब नॉन-रोड (खेतों/गैर-सड़क) वाहनों तक विस्तार देने की ज़रूरत है। ट्रैक्टर इस बदलाव का अगला स्वाभाविक चरण हैं। हमारा पायलट अध्ययन दिखाता है कि ई-ट्रैक्टर प्रदर्शन के मामले में पहले से ही डीजल ट्रैक्टरों की बराबरी कर सकते हैं, जबकि लागत में भारी कटौती करते हैं। अवसर मौजूद है, अब बस ऑन-रोड वाहनों जैसी नीतिगत मदद (Policy Support) की आवश्यकता है।”— अमित भट्ट, प्रबंध निदेशक (भारत), ICCT
“भारत के ई-वी परिवर्तन ने सबसे पहले संवेदनशील समुदायों को राहत दी है, जिसकी शुरुआत दोपहिया और तिपहिया वाहन चालकों से हुई। इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर किसानों के लिए भी वही काम कर सकते हैं: कम लागत, बेहतर आय, और शोर व कंपन में कमी जो उनके स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाती है, साथ ही बाकी सभी के लिए प्रदूषण में कटौती। हमारा पायलट अध्ययन दर्शाता है कि तकनीक तैयार है — अब राष्ट्रीय और राज्य सरकारों द्वारा ई-ट्रैक्टरों की मांग और आपूर्ति को गति देने के लिए एक ठोस नीतिगत प्रयास की ज़रूरत है।”— अरविंद हरिकुमार, शोधकर्ता और अध्ययन के लेखक
