गुरुकुल जैसी संस्थाएं भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों और संस्कारों को संरक्षित रखने के साथ-साथ भावी पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
Institutions like Gurukuls play a significant role in preserving the Indian knowledge tradition, moral values, and cultural ethos, while also preparing the future generation for nation-building: President Droupadi Murmu

नई दिल्ली , 1 नवंबर – राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि गुरुकुल जैसी संस्थाएं भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों और संस्कारों को संरक्षित रखने के साथ-साथ भावी पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने स्वामी श्रद्धानंद जी के महान व्यक्तित्व, त्याग, तपस्या और राष्ट्रसेवा के प्रति उनके समर्पण को नमन किया तथा भारतीय संस्कृति एवं वैदिक शिक्षा के प्रचार-प्रसार में गुरुकुल कुरुक्षेत्र के योगदान की सराहना की। राष्ट्रपति रविवार को कुरुक्षेत्र स्थित गुरुकुल कुरुक्षेत्र में आयोजित 114वें स्थापना वर्ष समारोह एवं स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान की शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित ‘बलिदान शताब्दी समारोह’ में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं।
इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष, आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रतिनिधियों सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी कहा कि गुरुकुल के इस पवित्र प्रांगण में इतिहास की प्रेरणा, वर्तमान का गौरव और भविष्य का संकल्प तीनों एक साथ दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज का दिन हर हरियाणावासी के लिए विशेष है, क्योंकि प्रदेश अपनी स्थापना के 60 वर्ष पूरे कर हीरक जयंती मना रहा है। इसी शुभ अवसर पर महान स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद् और समाज सुधारक स्वामी श्रद्धानंद जी का बलिदान शताब्दी वर्ष तथा गुरुकुल कुरुक्षेत्र का 114वां स्थापना समारोह मनाया जा रहा है। उन्होंने स्वामी श्रद्धानंद जी को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए गुरुकुल परिवार को स्थापना दिवस और प्रदेशवासियों को हरियाणा दिवस एवं हीरक जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि ज्ञान और संस्कार के इस तीर्थ में राष्ट्रपति की उपस्थिति शिक्षा के महत्व को और अधिक रेखांकित करती है।
स्वामी श्रद्धानंद जी ने शिक्षा को राष्ट्र जागरण का बनाया आधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद जी ने गुलाम भारत में स्वाभिमान जगाया, सामाजिक सुधार की चेतना पैदा की और राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन समर्पित किया। महर्षि दयानंद सरस्वती जी के विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने ज्ञान, चरित्र और सेवा के आधार पर सशक्त समाज के निर्माण का मार्ग दिखाया। स्वामी जी जानते थे कि राष्ट्र का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी के संस्कारों और सामर्थ्य से बनता है। इसी उद्देश्य से उन्होंने ऐसी शिक्षा का संकल्प लिया, जो विद्यार्थी को ज्ञानवान, अनुशासित, साहसी, स्वावलंबी और राष्ट्र के प्रति समर्पित बनाए।
उन्होंने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान के 100 वर्ष पूरे होने के इस अवसर पर उनके आदर्श हमें अपने कर्तव्यों के प्रति और अधिक सजग करते हैं। उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम शिक्षा का प्रकाश समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1912 में स्वामी श्रद्धानंद जी द्वारा स्थापित यह गुरुकुल उनकी दूरदृष्टि की जीवंत धरोहर है। यहां भारतीय परंपरा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की भावना को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने इस संस्था की यात्रा में योगदान देने वाले आचार्यों, प्रबंधकों, सहयोगियों और पूर्व विद्यार्थियों का अभिनंदन किया। साथ ही, आचार्य देवव्रत जी के गुरुकुल के प्रति समर्पण और संस्कारयुक्त शिक्षा के प्रसार के प्रयासों की भी सराहना की।
मुख्यमंत्री ने आचार्य देवव्रत जी द्वारा की जा रही प्राकृतिक खेती की भी सराहना की,उन्होंने कहा उनके द्वारा 180 एकड़ में प्राकृतिक खेती की जाती है जहां पर कोई भी कीटनाशक दवाई का इस्तेमाल नहीं होता।
विद्यार्थियों ने प्रस्तुतियों से किया स्वामी श्रद्धानंद जी के जीवन और बलिदान का चित्रण
समारोह में गुरुकुल के विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपरा और शारीरिक शिक्षा पर आधारित विभिन्न प्रस्तुतियां देकर उपस्थित अतिथियों का मन मोह लिया। विद्यार्थियों ने मलखंभ, सूर्य नमस्कार और व्यायाम के माध्यम से अपनी प्रतिभा, अनुशासन एवं शारीरिक दक्षता का प्रदर्शन किया। इसके साथ ही स्वामी श्रद्धानंद जी के जीवन, संघर्ष, सामाजिक सुधार के कार्यों, राष्ट्रभक्ति और बलिदान पर आधारित विशेष प्रस्तुति भी दी गई। इस प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों ने महान संत एवं राष्ट्रभक्त के प्रेरणादायक जीवन और उनके आदर्शों को प्रभावशाली ढंग से जीवंत किया।
