भारत को शोधकर्ताओं, उद्यमियों, उत्पाद विकासकर्ताओं, शिक्षकों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों की आवश्यकता : जितिन प्रसाद
India needs researchers, entrepreneurs, product developers, teachers and technology experts: Jitin Prasad
विश्वविद्यालय का पहला बैच इसकी नींव का हिस्सा बनेगा: एस. कृष्णन, सचिव, एमईआईटीवाई
सेमीकंडक्टर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है: एस. कृष्णन, सचिव, एमईआईटीवाई
एनआईईएलआईटी रोपड़ का पहला दीक्षांत समारोह आयोजित; 102 विद्यार्थियों को प्रदान की गईं स्नातकोत्तर डिग्रियां

रूपनगर (रोपड़)/चंडीगढ़, 1 नवंबर 2026: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई), भारत सरकार के अधीन राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईईएलआईटी) मानित विश्वविद्यालय (एनडीयू) का पहला दीक्षांत समारोह आज पंजाब के रूपनगर (रोपड़) स्थित बड़ा फूल में इसके मुख्य परिसर में आयोजित किया गया। इस अवसर पर 102 स्नातकों को स्नातकोत्तर डिग्रियां प्रदान की गईं। वर्ष 2024 में एनआईईएलआईटी को मानित विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद यह पहला स्नातक बैच है। शैक्षणिक उत्कृष्टता के सम्मान में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को आठ स्वर्ण पदक और पांच रजत पदक प्रदान किए गए।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री और विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर, माननीय श्री जितिन प्रसाद का औपचारिक संदेश एनआईईएलआईटी रोपड़ के कार्यकारी निदेशक श्री दीपक वासन द्वारा पढ़कर सुनाया गया।
अपने संदेश में श्री जितिन प्रसाद ने कहा कि भारत की प्रौद्योगिकी यात्रा एक नए चरण में प्रवेश कर रही है और इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, दूरसंचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में देश की क्षमताओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को ऐसे कुशल पेशेवरों की आवश्यकता है, जो प्रौद्योगिकियों का डिजाइन, विकास, सुरक्षा, विनिर्माण और सुधार कर सकें।
शैक्षणिक संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को वास्तविक दुनिया की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार करने हेतु संस्थानों को मजबूत शैक्षणिक आधार के साथ व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को ऐसे शोधकर्ताओं, उद्यमियों, उत्पाद विकासकर्ताओं, शिक्षकों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों की आवश्यकता है, जो जनकल्याण में योगदान दे सकें और देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत कर सकें।
पहले ऐतिहासिक दीक्षांत समारोह के अवसर पर स्नातकों को बधाई देते हुए उन्होंने उनसे अपने ज्ञान का उपयोग स्वयं के लिए और अपने समुदायों के लिए अवसर सृजित करने तथा विकसित भारत@2047 के विजन में योगदान देने का आग्रह किया।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव श्री एस. कृष्णन, आईएएस, मुख्य अतिथि के रूप में दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में मंत्रालय के लंबे अनुभव तथा उच्च शिक्षा और अनुसंधान पर केंद्रित विश्वविद्यालय व्यवस्था से जोड़ने के महत्व की दिशा में इसके परिवर्तन को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि संस्थान से मंत्रालय की अपेक्षाएं केवल स्नातक तैयार करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसमें अनुप्रयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देना, उद्योग जगत के साथ संबंधों को मजबूत करना और सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा तथा दूरसंचार सहित उभरती प्रौद्योगिकियों के अनुरूप तेजी से कार्य करना भी शामिल है।
पहले स्नातक बैच के महत्व को रेखांकित करते हुए श्री कृष्णन ने कहा, “किसी विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा समय के साथ बनती है और उसके पहले स्नातक संस्थान की उस नींव का हिस्सा बन जाते हैं।”
उन्होंने सेमीकंडक्टर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भारत की तीव्र प्रगति पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाने और देश के तकनीकी विकास में योगदान देने में शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) एम. एम. त्रिपाठी ने विश्वविद्यालय की रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें संस्थान के विस्तारित शैक्षणिक आधार, अनुसंधान पहलों, बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक उपलब्धियों को रेखांकित किया गया। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान, कौशल विकास तथा क्षमता निर्माण में संस्थान के योगदान का भी उल्लेख किया।उन्होंने बताया कि ग्रेजुएट हो रहे 102 मास्टर्स स्टूडेंट्स में से 65 को पहले ही प्लेसमेंट मिल चुका है, जबकि दूसरों के लिए प्लेसमेंट एक्टिविटीज़ चल रही हैं और हाल ही में हुए इंडस्ट्रियल प्लेसमेंट को जल्द ही फाइनल कर दिया जाएगा।
इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत एनआईईएलआईटी मानित विश्वविद्यालय, मुख्य परिसर, रोपड़ के कार्यकारी निदेशक श्री दीपक वासन के स्वागत संबोधन से हुई। स्नातक विद्यार्थियों को औपचारिक रूप से स्नातकोत्तर डिग्रियां प्रदान की गईं और शपथ विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. मनीष अरोड़ा द्वारा दिलाई गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह प्रतिवेदन भी जारी किया गया।
दीक्षांत समारोह में श्री आदित्य दचलवाल, उपायुक्त, रूपनगर; प्रो. (डॉ.) राजीव आहूजा, निदेशक, आईआईटी रोपड़; श्री कंवलजीत सिंह, महानिदेशक, एससीएल; प्रख्यात शिक्षाविद् एवं प्रोफेसर; एमईआईटीवाई के वरिष्ठ अधिकारी; विश्वविद्यालय के घटक परिसरों के प्रतिनिधि तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
