हरियाणा के सभी विभाग सुशासन और उत्कृष्टता के लिए बेस्ट प्रैक्टिसज पर जोर दें: मुख्यमंत्री
All departments of Haryana should emphasize on best practices for good governance and excellence: CM

नई दिल्ली 28 सितंबर — हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने विभिन्न विभागों में ऐसी कार्यप्रणालियों और नवाचारों को अपनाने पर विशेष जोर दिया है, जिनसे सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता, पारदर्शिता, जवाबदेही और परिणामों में सुधार हो। इसी कड़ी में सोमवार को मुख्यमंत्री के समक्ष उच्च शिक्षा विभाग, तकनीकी शिक्षा विभाग तथा लोक निर्माण विभाग ने अपनी बेस्ट प्रैक्टिसेज और उपलब्धियों से संबंधित प्रस्तुतियां दी। इस दौरान संस्थागत उत्कृष्टता, अनुसंधान एवं नवाचार, डिजिटल तकनीक के प्रभावी उपयोग, नागरिक सहभागिता तथा प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन जैसे विषयों पर विशेष फोकस किया गया।
विकसित किए जा रहे ‘मॉडल संस्कृति कॉलेज’
उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री एके सिंह ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा सरकारी कॉलेजों को उत्कृष्ट संस्थानों के रूप में विकसित करने के लिए हर जिले में एक कॉलेज को ‘मॉडल संस्कृति कॉलेज’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रदेश के 23 सरकारी कॉलेजों की पहचान की गई है, जिन्हें वर्ष 2029 तक संस्थागत उत्कृष्टता के स्तर तक ले जाने का लक्ष्य है। इन कॉलेजों में विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप पाठ्यक्रम, डिजिटल एवं ब्लेंडेड लर्निंग, उद्योगों के साथ सहयोग, इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप, विशेषज्ञ व्याख्यान, वर्चुअल लैब, ई-संसाधन, इनक्यूबेशन सेंटर तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
अनुसंधान और नवाचार के लिए बनाया स्टेट रिसर्च फंड
उन्होंने बताया कि प्रदेश में अनुसंधान व नवाचार को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा स्टेट रिसर्च फंड स्थापित किया गया है। ऐसा करने वाला हरियाणा देश का पहला राज्य है जिसकी सराहना नीति आयोग ने भी की है। इस फंड के अंतर्गत शोध कार्यों में लगे संस्थानों के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2025-26 में इसके लिए 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। गत वर्ष उच्च शिक्षा संस्थानों से सहायता के लिए 350 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 90 परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई। अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्रों में कृषि एवं ग्रामीण विकास, औद्योगिक नवाचार एवं उद्यमिता, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, एडटेक, आयुष, योग, जलवायु एवं जल संरक्षण, कौशल एवं रोजगार तथा समावेशन शामिल हैं। इसके साथ ही उच्च शिक्षा गुणवत्ता एवं अनुसंधान उत्कृष्टता के लिए 20 करोड़ रुपये के अलग फंड की व्यवस्था की गई है। विद्यार्थियों को पेटेंट के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रति पेटेंट 50 हजार रुपये तक पंजीकरण शुल्क की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति का प्रावधान भी किया गया है।
नए शिक्षकों को मिलेगा एक समान इंडक्शन प्रशिक्षण
उन्होंने बताया कि सरकारी कॉलेजों में नवनियुक्त सहायक प्रोफेसरों के लिए टीचर्स इंडक्शन प्रोग्राम शुरू किया गया है। लगभग 2,000 नए सहायक प्रोफेसरों के लिए पांच दिवसीय प्रशिक्षण मॉडल तैयार किया गया है। इसमें व्यावसायिक नैतिकता, मेंटरिंग, समग्र विद्यार्थी विकास, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, भारतीय ज्ञान परंपरा, शासन व्यवस्था, उद्योग से जुड़ाव, अनुसंधान, नवाचार और समावेशी सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी जैसे विषय शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शिक्षा की गुणवत्ता के मद्देनजर शिक्षकों का प्रशिक्षण बहुत महत्वपूर्ण है। प्रदेश में टीचर ट्रेनिंग के लिए प्रदेश में कम से कम चार स्थानों पर सेंटर बनाए जाएं और प्रत्येक शिक्षक की नियुक्ति के बाद शिक्षण कार्य शुरू करने से पहले उसकी ट्रेनिंग की जानी सुनिश्चित की जाए।
सरकारी पॉलिटेक्निक में प्रदर्शन आधारित रैंकिंग
श्री एके सिंह ने बताया कि तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए परफॉर्मेंस-बेस्ड रैंकिंग की व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत बेहतर प्रदर्शन करने वाले संस्थानों को प्रोत्साहित करने के लिए पुरस्कार दिए जाते हैं। प्रस्तुति के अनुसार प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले चौधरी देवी लाल राजकीय पॉलिटेक्निक, नाथूसरी चौपटा (सिरसा) को 50 लाख रुपये, द्वितीय स्थान पर आए राजकीय पॉलिटेक्निक, लिसाना (रेवाड़ी) को 25 लाख रुपये और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले राजकीय महिला पॉलिटेक्निक, सिरसा को 10 लाख रुपये का पुरस्कार दिया गया है। उन्होंने बताया कि तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार के लिए एनबीए (राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड) से मान्यता प्राप्त डिप्लोमा कार्यक्रमों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
‘म्हारी सड़क’ से सड़क प्रबंधन में डिजिटल पारदर्शिता
लोक निर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री एके सिंह ने बताया कि प्रदेश में सड़क संबंधी शिकायतों के त्वरित एवं पारदर्शी समाधान के लिए एक साल पहले शुरू किया गया ‘म्हारी सड़क’ मोबाइल एप महत्वपूर्ण डिजिटल पहल है। इसके माध्यम से नागरिक खराब सड़क, गड्ढों अथवा सड़क रखरखाव से जुड़ी शिकायतें फोटो और जियो-लोकेशन के साथ दर्ज कर सकते हैं तथा शिकायत की प्रगति को वास्तविक समय में ट्रैक कर सकते हैं। शिकायत संबंधित सड़क-स्वामित्व विभाग के अधिकारियों तक स्वतः पहुंचती है और कार्य पूरा होने के बाद जियो-फोटोग्राफिक प्रमाण भी अपलोड किया जाता है।
उन्होंने बताया कि अब तक 63,389 किलोमीटर सड़क लंबाई का डिजिटाइजेशन और जियो-फेंसिंग की जा चुकी है। इस एप पर आई शिकायतों को 48 घंटे के भीतर संबंधित विभाग व अधिकारी द्वारा अंडरटेक किया जाता है और अगले 10 दिनों में समस्या का निराकरण करना होता है। साथ ही डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड (डीएलपी) की ट्रैकिंग और ठेकेदारों के प्रदर्शन की निगरानी की व्यवस्था भी की गई है। उन्होंने बताया कि ‘म्हारी सड़क’ की व्यवस्था नागरिक से शिकायत दर्ज होने से लेकर विभाग को भेजने, अभियंता द्वारा निरीक्षण और कार्य पूरा होने के बाद शिकायत बंद करने तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल रूप से ट्रैक करती है। इससे सड़क रखरखाव व्यवस्था में नागरिक सहभागिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिलता है।
टूटी सड़कों को प्राथमिकता से ठीक करवाने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि टूटी सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर ठीक करवाया जाए और सड़कों पर पैच लगाने का कार्य शीघ्रता से करवाने के लिए जरूरत के अनुसार जिलों में पैच मशीनें खरीद ली जाएं। उन्होंने कहा कि सड़क कनेक्टिविटी को दुरुस्त रखना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है, क्योंकि टूटी सड़कें न केवल आमजन की परेशानी का कारण बनती हैं बल्कि यह विकास, व्यापार व उद्योगों की रफ्तार में भी बाधा डालती हैं।
परिणाम आधारित शासन की ओर बढ़ता हरियाणा
मुख्यमंत्री ने कहा कि विभागों की नई पहलों के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरतों के अनुरूप तकनीक और नवाचार का उपयोग करते हुए मापनीय परिणाम, डिजिटल निगरानी, जवाबदेही और संस्थागत सुधार पर जोर दिया जा रहा है। उच्च शिक्षा में संस्थानों और शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने, सड़क क्षेत्र में नागरिकों को सीधे व्यवस्था से जोड़ने तथा तकनीकी शिक्षा में संस्थानों के प्रदर्शन को प्रोत्साहित करने की इन पहलों से सरकारी व्यवस्था को अधिक परिणामोन्मुख बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे प्रदेश के विकास को नई गति मिलेगी और आमजन का जीवन अधिक सुगम व आसान होगा।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री अरुण गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री एके सिंह, श्री विजयेंद्र कुमार, आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल, निगरानी एवं समन्वय की विशेष सचिव डॉ. प्रियंका सोनी तथा एचएसआईआईडीसी के प्रबंध निदेशक श्री विनय प्रताप सिंह सहित अन्य विभागों के अधिकारी भी मौजूद थे।
