मोटापे से परेशान लोगों के लिए वरदान बन रही बेरिएट्रिक सर्जरी

Bariatric surgery is becoming a boon for people suffering from obesity.

कुरुक्षेत्र, 11जनवरी 2024: बेरिएट्रिक सर्जरी यानी चर्बी घटाने की सर्जरी के क्षेत्र में लगातार नई-नई तकनीक आ रही हैं. इन एडवांसमेंट के चलते उन लोगों को एक उम्मीद मिली है मोटापे के कारण जिनका जीवन मुश्किल हो गया है. इलाज के इन नए विकल्पों की जानकारी देने के उद्देश्य से मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल वैशाली (गाजियाबाद) ने आज कुरुक्षेत्र में एक अवेयरनेस सेशन आयोजित किया.

इस मौके पर मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल वैशाली में मिनिमल एक्सेस, बेरिएट्रिक एंड रोबोटिक सर्जरी विभाग के हेड व डायरेक्टर डॉक्टर विवेक बिंदल मौजूद रहे*. डॉक्टर बिंदल के साथ कुरुक्षेत्र के तीन मरीज भी उपस्थित रहे, जिनका सफलतापूर्वक इलाज किया गया. यहां डॉक्टरों ने इस बात पर जोर दिया कि मिनिमली एक्सेस बेरिएट्रिक सर्जरी ने न सिर्फ मोटापे से परेशान लोगों को एक नई आशा प्रदान की है, बल्कि इसके कारण होने वाली अन्य बीमारियों से छुटकारा पाने का भी विकल्प मिला है.

इस दौरान यहां मैक्स हॉस्पिटल वैशाली ने कुरुक्षेत्र के राधा किशन अस्पताल के साथ मिलकर ओपीडी शुरू करने का भी ऐलान किया. इस ओपीडी में डॉक्टर विवेक बिंदल हर महीने के दूसरे गुरुवार को मरीज देखने के लिए उपलब्ध रहेंगे.

*मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल वैशाली में मिनिमल एक्सेस, बेरिएट्रिक एंड रोबोटिक सर्जरी विभाग के हेड व डायरेक्टर डॉक्टर विवेक बिंदल ने कुरुक्षेत्र के मरीजों की सक्सेस स्टोरी बताते हुए कहा*, ”मरीज विनीत कुमार का बीएमआई 44.3 किलो/मी स्क्वायर था. उन्हें मेटाबॉलिक सिंड्रोम था और मोटापा होने के चलते उन्होंने बेरिएट्रिक प्रक्रिया के बारे में परामर्श किया. उनकी सर्जरी की गई और सर्जरी से उनका 42 किलो वजन कम हो गया. इसके बाद बैलेंस डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज और लगातार फॉलो अप से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आए. सर्जरी से सिर्फ उनका वजन कम करने में ही मदद नहीं मिली, बल्कि मेटाबॉलिक सिंड्रोम व अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी ठीक हो गईं.”

कुरुक्षेत्र के ही दूसरे मरीज 42 वर्षीय दीपक का वजन 120 किलो और बीएमआई 42 किलो/मीटर स्क्वायर था. उन्हें मेटाबॉलिक सिंड्रोम, डायबिटीज, हाइपोथायॉइडिज्म, ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया (ओएसए) और लोवर बैक में दर्द था. उनकी सफल बेरिएट्रिक सर्जरी की गई जिसकी मदद से दीपक का वजन 32.8 किलो घट गया. इससे उनका शरीर को बेहतर हो ही गया, साथ ही अन्य बीमारियां भी कंट्रोल हो गईं.

इसी तरह का मामला अंशुल सिंगला का था. अंशुल का वजन 118.5 किलो और बीएमआई 39.1 किलो/मीटर स्क्वायर था. इसके साथ उन्हें मोटाबॉलिक सिंड्रोम, हाइपरटेंशन (एचटीएन), प्री-डायबिटीज और ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया था. सर्जरी की मदद से अंशुल का वजन 45 किलो कम हो गया और एक अच्छे वजन 74 किलो तक आ गए. इसके बाद उन्होंने मेटाबॉलिक सिंड्रोम और हाइपरटेंशन के लिए दवाएं लेना जारी रखा. वहीं, ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया के लिए उन्हें सीपीएपी मशीन की जरूरत नहीं पड़ती. कुल मिलाकर उनकी सेहत में काफी सुधार देखा गया.

*इन तीन मामलों की जानकारी देने के साथ डॉक्टर विवेक ने आगे कहा*, ”इन सक्सेस स्टोरी से बेरिएट्रिक सर्जरी के सकारात्मक असर का पता चलता है. इससे न सिर्फ वजन कम हो रहा है बल्कि उससे जुड़ी अन्य बीमारियां भी कंट्रोल हो रही हैं. बेरिएट्रिक सर्जरी के क्षेत्र में लगातार तरक्की हो रही है, ऐसे में ये प्रक्रिया लोगों की जिंदगी बदलने में बहुत योगदान दे रही है और लोगों को स्वस्थ व क्वालिटी लाइफ मिल रही है.”

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