विश्व पटल पर BRICS की गूंज: दुनिया का बदलता शक्ति संतुलन!
Echo of BRICS on the world stage: The changing balance of power of the world!
दुनिया इस समय एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। वैश्विक राजनीति हो या अर्थव्यवस्था, हर क्षेत्र में पुरानेसमीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। कभी पश्चिमी देशों केइर्द-गिर्द घूमने वाली वैश्विक आर्थिक व्यवस्था अब एक नई दिशा की ओर बढ़ रही है। इसी बदलते दौर में BRICS का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
दिल्ली में आयोजित BRICS Business Forum ने दुनिया काध्यान एक बार फिर भारत और BRICS की ओर खींचा है। सम्मेलन में आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश, स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल और वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में विकासशील देशों की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
इस मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS की बढ़ती ताकत और भारत के उस विजन को सामने रखा, जिसमें भारत खुद को दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक Economic Bridge के रूप में देख रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि BRICS केवल कुछ देशों का आर्थिक समूह नहीं है, बल्कि यह वैश्विक दक्षिण यानी GlobalSouth की आवाज को मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच बनता जा रहा है। भारत का जोर इस बात पर है कि सदस्य देशोंके बीच व्यापार और निवेश के नए रास्ते खोले जाएं, आपसी सहयोग बढ़े और आर्थिक विकास का लाभ ज्यादा से ज्यादा देशों तक पहुंचे।
भारत की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत एक ओर पश्चिमी देशों के साथ मजबूत आर्थिक और रणनीतिक संबंध बनाए हुए है, तो दूसरी ओर रूस, ईरान और अन्य BRICS देशों के साथ भी अपने संबंधों को लगातार मजबूत कर रहा है। यही संतुलन भारत को वैश्विक मंच पर एक महत्वपूर्ण Economic Bridge की भूमिका निभाने का अवसर देता है।
लेकिन इस सम्मेलन में सबसे ज्यादा चर्चा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बयान को लेकर भी हुई। पुतिन ने BRICSकी आर्थिक ताकत को रेखांकित करते हुए कहा कि आर्थिक विकास के मामले में BRICS, G7 से आगे निकल चुका है।
यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लंबे समय से G7 को दुनिया की सबसे प्रभावशाली विकसित अर्थव्यवस्थाओं के समूहके रूप में देखा जाता रहा है। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान जैसे देश वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय व्यवस्था में लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।
लेकिन अब तस्वीर बदल रही है।
BRICS के विस्तार के साथ इसमें दुनिया की कई बड़ी और तेजीसे बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हो रही हैं। चीन, भारत, रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों के साथ नए सदस्य जुड़नेसे इस समूह का आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव पहले की तुलना में कहीं ज्यादा व्यापक हो गया है।
BRICS की बढ़ती ताकत का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है किइसके सदस्य देश वैश्विक व्यापार व्यवस्था में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने की संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं।
इसी मुद्दे को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजिशियान ने भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने BRICS सदस्य देशों के बीच व्यापार मेंस्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की वकालत की।
अगर सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ता है, तो इससे डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक कदम माना जा सकता है। हालांकि, यह बदलाव आसान नहीं है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर की भूमिका बहुत मजबूत है और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में इसकी गहरी पकड़ है।
फिर भी, BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की चर्चा यह बताती है कि दुनिया के कई देश मौजूदा वित्तीय व्यवस्था के विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।
यही वजह है कि दिल्ली का यह सम्मेलन सिर्फ एक Business Forum नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक आर्थिक सोच का संकेत भी माना जा रहा है।
अब सवाल यह है कि आखिर BRICS की बढ़ती ताकत दुनिया के लिए इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?
इसका सबसे बड़ा कारण है—आर्थिक शक्ति का बदलता केंद्र।
दुनिया की बड़ी आबादी BRICS और उसके विस्तारित समूह से जुड़े देशों में रहती है। इन देशों के पास विशाल बाजार, प्राकृतिक संसाधन, ऊर्जा स्रोत, युवा आबादी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं हैं।
भारत और चीन जैसी अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक विकास में महत्वपूर्णयोगदान दे रही हैं। रूस ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों के मामले में बेहद महत्वपूर्ण है। ब्राजील कृषि और प्राकृतिक संसाधनों केलिहाज से बड़ी ताकत है। वहीं, दक्षिण अफ्रीका अफ्रीकीमहाद्वीप में एक महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्र है।
इस पूरी तस्वीर को देखें तो BRICS केवल आर्थिक आंकड़ों का समूह नहीं है। यह दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने वाला एक बड़ा मंच भी बन सकता है।
भारत इस बदलते समीकरण में अपनी भूमिका को बेहदसावधानी से आगे बढ़ा रहा है। भारत एक तरफ पश्चिमी देशों केसाथ व्यापार, तकनीक और निवेश के संबंधों को मजबूत कर रहा है, वहीं BRICS के माध्यम से Global South के देशों के साथ भी सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
यही भारत की रणनीतिक ताकत है—सभी प्रमुख शक्ति केंद्रों के साथ संवाद बनाए रखना।
भारत के लिए BRICS इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह विकासशील देशों की उन चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने का अवसर देता है, जिनका समाधान लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। इनमें विकास के लिए वित्तीय संसाधन, तकनीकी सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक संस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे शामिल हैं।
हालांकि BRICS के सामने कई चुनौतियां भी हैं।
सदस्य देशों की राजनीतिक व्यवस्थाएं, आर्थिक प्राथमिकताएं और विदेश नीति के हित हमेशा एक जैसे नहीं होते। भारत और चीन के बीच कई मुद्दों पर मतभेद हैं। रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव का असर भी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे में इतने अलग-अलग हितों वाले देशों को एक साझा मंच पर लंबे समय तक एकजुट रखना आसान काम नहीं है।
इसके बावजूद BRICS का लगातार विस्तार यह बताता है कि दुनिया के कई देश इस मंच को भविष्य की वैश्विक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
आज दुनिया एक ऐसी बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है, जहां किसी एक देश या समूह का प्रभाव पहले की तरहनिर्णायक नहीं रह सकता। आर्थिक शक्ति कई केंद्रों में बंट रही है और इसी के साथ राजनीतिक प्रभाव भी बदल रहा है।
दिल्ली का BRICS Business Forum इसी बदलाव की एकमहत्वपूर्ण तस्वीर पेश करता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का Economic Bridge वाला विजन, रूस के राष्ट्रपति पुतिन का BRICS की आर्थिक ताकत पर जोर और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजिशियान का स्थानीय मुद्राओं में व्यापार का समर्थन—इन सभी बयानों को एक साथ देखें तो एक बड़ी तस्वीर सामने आती है।
एक बदलती हुई वैश्विक अर्थव्यवस्था की।
BRICS आने वाले वर्षों में कितना प्रभावशाली बनेगा, यह कई बातों पर निर्भर करेगा। क्या सदस्य देश आपसी व्यापार को औरबढ़ा पाएंगे? क्या स्थानीय मुद्राओं में व्यापार वास्तव में बड़े स्तर पर संभव हो पाएगा? क्या BRICS वैश्विक वित्तीय संस्थाओं मेंसुधार के लिए प्रभावी दबाव बना पाएगा? और सबसे महत्वपूर्ण—क्या इसके सदस्य देश अपने मतभेदों के बावजूद एक साझा आर्थिक रणनीति विकसित कर पाएंगे?
लेकिन एक बात स्पष्ट है—BRICS अब वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था का ऐसा मंच बन चुका है, जिसे नजरअंदाज करना आसान नहीं है।
दिल्ली से उठी BRICS की यह गूंज दुनिया के बदलते शक्ति संतुलन की ओर इशारा कर रही है। आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था का केंद्र और ज्यादा बहुध्रुवीय हो सकता है औरभारत इस नए समीकरण में एक अहम भूमिका निभाने की स्थिति में दिखाई दे रहा है।
यानी कहानी सिर्फ BRICS की नहीं है। कहानी उस नई दुनिया की है, जहां आर्थिक ताकत, राजनीतिक प्रभाव और वैश्विक नेतृत्व के पुराने समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले वर्षों में BRICS इस बदलतीदुनिया को कितनी नई दिशा देता है और भारत इस नए वैश्विक शक्ति संतुलन में अपनी भूमिका को किस तरह आगे बढ़ाता है।

