शोध नैतिक मूल्य आधारित और पक्षपात रहित होना चाहिए- डॉ. रवि नारायणन।

Research should be based on ethical values and be unbiased - Dr. Ravi Narayanan.

आयुष विवि में चिकित्सा अनुसंधान में आईईसी की भूमिका और जिम्मेदारी पर प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन।

श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता रिसर्च विभाग द्वारा शनिवार को चिकित्सा अनुसंधान में आईईसी (संस्थागत आचार समिति) की भूमिका और जिम्मेदारी पर प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। विषय विशेषज्ञ एवं मुख्य वक्ता केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. रबिनारायण आचार्य रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने की। रिसर्च विभाग के अधिष्ठाता डॉ. आशीष मेहता ने उपस्थित गणमान्य अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। मुख्य वक्ता डॉ. रबिनारायण ने अपने संबोधन में कहा कि आईईसी की प्रमुख जिम्मेदारी अनुसंधान प्रतिभागियों के अधिकारों और कल्याण की रक्षा करना है। आईईसी अनुसंधान प्रस्तावों की समीक्षा करने के लिए नियमित बैठक आयोजित करता है इसके साथ ही जांचकर्ताओं को सुझाव देता है कि वे उन्हें अनुमोदित करने से पहले इस बात की जांच जरूर करें की प्रस्तावित शोध विषय नैतिक मूल्यों पर आधारित है या नहीं। उन्होंने कहा कि शोध में नैतिकता की महत्वपूर्ण भूमिका होती है इसलिए शोध कार्य नैतिक मूल्यों को ध्यान में रखकर करना चाहिए ताकि शोध पक्षपात रहित और शोध परिणाम सुसंगत प्राप्त हो सके। हालांकि नैतिक मूल्यों का पालन व्यापारी, कानूनविद, और सामान्य नागरिक भी करता है मगर एक चिकित्सक नैतिक मूल्यों का पालन करता है तो वह रोगियों का इलाज अच्छे प्रकार से कर पाएगा। इस अवसर पर कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि मेडिकल फील्ड में नैतिक रूप से अनुसंधान होना चाहिए, अनैतिक नहीं, क्योंकि अनुसंधान का समाज पर बहुत प्रभाव पड़ता है। चरक संहिता में महर्षि चरक ने लिखा है चिकित्सक रोगी के रोग की पूर्ण रूप से चिकित्सा करें, किन्तु रोगी को किसी प्रकार की हानि नहीं होनी चाहिए। उसे ही श्रेष्ठ चिकित्सक कहा जाता हैं। मगर अन्य चिकित्सा पद्धति में यह बात अब समझ में आनी शुरू हुई है। कार्यक्रम के अंत में डीन एकेडमिक अफेयर्स डॉ. जेके पंडा ने सभी गणमान्यों का धन्यवाद प्रकट किया। इस अवसर पर संस्थागत नैतिकता समिति के चेयरमैन और दिल्ली एनसीआईएसएम के सदस्य प्रो. डॉ. बीएल मेहरा, रजनीकांत शर्मा, जितेंद्र शर्मा, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. भूपेंद्र कोर आनंद, राज कुमार मक्कड, श्रीमती शकुंतला शर्मा, उपेंद्र सिंगल, अशोक रोशा, प्रो. बलबीर संधू, प्रो. जितेश कमार पंडा उपस्थित रहे।

You might also like