अबूझमाड़ के बदलने लगे हैं हालात, ‘माड़ बचाओ’ अभियान से इलाके में शांति की नई उम्मीद
The situation in Abujhmad has started changing, 'Save Maad' campaign has brought new hope of peace in the area

अबूझमाड़, छत्तीसगढ़ के नक्सलप्रभावित अबूझमाड़ का नाम सुनते ही घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ियों तथा वहां छिपे खतरनाक नक्सलियों का ख्याल जहां एक सिहरन पैदा करती है और जहां आम इंसान का पहुंचना मुश्किल होता है, वहां अब हालात बदलने लगे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में चलाये गये ‘माड़ बचाओ’ अभियान से नक्सलियों के इस गढ़ में शांति की एक नई उम्मीद जगी है। सुरक्षा बलों के लगातार अभियान से नक्सलियों को निरंतर चुनौती मिल रही है।
मुख्यमंत्री स्वयं ऐसे अभियानों की निरंतर समीक्षा कर रहे हैं और हर कदम की बारीकी से निगरानी करते हैं। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से समय-समय पर फीडबैक लेकर यह सुनिश्चित किया है कि हर अभियान नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक साबित हो। उनका उद्देश्य स्पष्ट है-नक्सल प्रभावित इलाकों को आतंक से मुक्त करके, वहाँ शांति और सुरक्षा का वातावरण स्थापित करना। उनका कहना है कि अबूझमाड़ और अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को पूरी तरह से मुक्त किया जाना उनकी सरकार का लक्ष्य है, ताकि यहां के लोगों को विकास और स्थिरता का अनुभव हो।
श्री साय का ध्यान केवल सुरक्षा अभियानों तक सीमित नहीं है बल्कि वह इन इलाकों में विकास कार्यों को भी अत्यधिक प्राथमिकता दे रहे हैं। सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को तेज़ी से लागू करने के लिए उन्होंने विशेष निर्देश दिये गये हैं।
इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ में लगातार चलाये जा नक्सल विरोधी अभियान और इन क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्यों की रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री से ले रहे हैं। उन्होंने कहा है कि नक्सलियों के पास अब दो ही रास्ते बचे हैं—या तो वे आत्मसमर्पण करें या सुरक्षा बलों की कार्रवाई का सामना करें। उनका यह बयान नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने और शांति की राह अपनाने के लिए प्रेरित करने वाला है, जिससे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास और सुरक्षा की दिशा में सकारात्मक बदलाव आ सके।
अबूझमाड़ में हाल में नक्सलियों के खिलाफ अभियान में सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता मिली है। गत 23 सितंबर को अबूझमाड़ में परादी के जंगलों में सुरक्षा बलों ने खुफिया जानकारी के आधार पर नक्सलियों के एक बड़े समूह को घेर लिया। सुरक्षा बलों ने तत्काल मोर्चा संभालते हुए नक्सलियों से आत्मसमर्पण करने को कहा लेकिन नक्सलियों ने जवाब में गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षा बलों ने भी इसका मुंहतोड़ जवाब दिया। दोनों पक्षों के बीच चली इस मुठभेड में तीन कुख्यात नक्सली मारे गये। इनमें एक महिला भी शामिल है। मुठभेड़ के बाद घटनास्थल से भारी संख्या में हथियार और विस्फोटक बरामद किये गये, जिनमें एके-47, इंसास, एसएलआर, और बीजीएल लॉन्चर जैसे अत्याधुनिक हथियार शामिल हैं।
अबूझमाड़ की मुठभेड़ में सुरक्षा बलों की सफलता के बाद यहां के ग्रामीणों में एक नई आशा जगी है। नक्सली आतंक के साये में घिरे लोग अब अपनी आजादी और विकास की उम्मीद में जी रहे हैं। सुरक्षा बलों के इस साहसिक अभियान ने साबित कर दिया है कि नक्सलियों का अबूझमाड़ में अब टिक पाना असंभव है। पुलिस महानिरीक्षक (बस्तर रेंज) सुंदरराज पी. ने बताया कि इस वर्ष बस्तर क्षेत्र में मुठभेड़ में ढेर 157 नक्सलियों के शव बरामद किये गये हैं और 663 को गिरफ्तार किया गया है जबकि 556 ने आत्मसमर्पण किया है।उन्होंने दावा किया कि अबूझमाड़ में नक्सलियों की कमर टूट चुकी है और बहुत जल्द यह क्षेत्र पूरी तरह नक्सल मुक्त हो जायेगा।
