अंकिता भंडारी को न्याय मिलने तक जारी रहेगा संघर्ष, उत्तराखंड की बेटी के सम्मान और स्वाभिमान की लड़ाई आखिरी सांस तक लड़ेंगे : एडवोकेट संदीप चमोली
The struggle will continue until justice is served for Ankita Bhandari; we will fight for the honor and self-respect of this daughter of Uttarakhand until our very last breath — Advocate Sandeep Chamoli

कुलदीप कुमार, देहरादून। उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी को संपूर्ण न्याय दिलाने की मांग को लेकर हमारा संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक उसे न्याय नहीं मिल जाता। यह केवल एक बेटी को न्याय दिलाने की लड़ाई नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की अस्मिता, मातृशक्ति के सम्मान, पहाड़ के स्वाभिमान और न्याय व्यवस्था पर जनता के विश्वास की लड़ाई है।
देश के माननीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी को उत्तराखंड की जनता की भावनाओं और जनआक्रोश को गंभीरता से समझना होगा। उन्हें यह संदेश स्पष्ट रूप से देना होगा कि उत्तराखंड का प्रत्येक नागरिक, प्रत्येक युवा और प्रत्येक जागरूक व्यक्ति अंकिता भंडारी को न्याय दिलाना चाहता है। अंकिता के माता-पिता द्वारा उठाई जा रही मांगों और उनकी पीड़ा को संवेदनशीलता के साथ सुना जाना चाहिए। इस मामले में निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय जांच तथा दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
हमारी मांग है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े प्रत्येक पहलू की निष्पक्ष जांच हो, किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को संरक्षण न मिले और पीड़ित परिवार को न्याय का पूरा भरोसा मिले। न्याय की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का राजनीतिक दबाव, प्रभाव या पक्षपात स्वीकार नहीं किया जा सकता।
आज यदि अपनी आवाज बुलंद करने के कारण हमें गिरफ्तार भी होना पड़े, तो हम इससे पीछे हटने वाले नहीं हैं। गिरफ्तारी हमारे संकल्प को कमजोर नहीं कर सकती और न ही हमारी आवाज को दबा सकती है। हम लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपने अधिकारों और न्याय की मांग को उठाते रहेंगे। आज एक कदम रोका जा सकता है, लेकिन न्याय की इस लड़ाई को रोकना संभव नहीं है।
मैं उत्तराखंड की जनता को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने का यह संघर्ष किसी राजनीतिक स्वार्थ या व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि पहाड़ की बेटी के सम्मान और उत्तराखंड के स्वाभिमान के लिए है। जब तक अंकिता को संपूर्ण न्याय नहीं मिलता और उसके परिवार को न्याय का वास्तविक एहसास नहीं होता, तब तक यह आवाज सड़कों से लेकर सत्ता के गलियारों तक गूंजती रहेगी।
यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, पूरे उत्तराखंड की लड़ाई है। यह संघर्ष रुकेगा नहीं, झुकेगा नहीं और न्याय मिलने तक थमेगा नहीं।
अंकिता को न्याय दो — उत्तराखंड का स्वाभिमान बचाओ!

