न्यू बेबी केयर अस्पताल अग्नि कांड में दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में हुए कई खुलासे
Many revelations made in Delhi Police's chargesheet in New Baby Care Hospital fire incident
नई दिल्ली, दिल्ली स्थित न्यू बेबी केयर अस्पताल में लगी आग के मामले में पुलिस ने दो डॉक्टरों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दी है। पुलिस ने कोर्ट में अस्पताल के मालिक डॉक्टर नवीन खिची और डॉक्टर आकाश के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। दिल्ली पुलिस ने इनपर भारतीय दंड संहिता की धारा 304, 308, 34 और 75 लगाया है। ईस्ट दिल्ली के एक प्राइवेट शिशु केयर अस्पताल में अगलगी की घटना को लेकर पुलिस ने 796 पन्नों की चार्जशीट दायर की है। इस चार्जशीट में कहा गया है कि यह अस्पताल बिना फायर सेफ्टी डिवाइस के चल रहा था और जब आग लगी थी तब स्टाफ ने जरुरी ऐक्शन नहीं लिया था। यहां आपको बता दें कि 25 मई को दिल्ली के विवेक विहार में स्थित बेबी केयर अस्पताल में भीषण अगलगी की घटना हुई थी। इस अगलगी में 7 नवजातों की मौत हो गई थी। उस वक्त दिल्ली फायर सर्विस (डीएफएस) के अधिकारियों ने कहा था कि न्यू बेबी केयर अस्पताल में रात करीब साढ़े ग्यारह बजे आग लगी थी। यह आग जल्द ही अस्पताल से जुड़ी दो अन्य इमारतों में फैल गई थी। आग की वजह से इस दो मंजिला इमारत में रखी ऑक्सीजन की कई सिलेंडरों में ब्लास्ट हुआ था। इसकी वजह से इमारत को भी नुकसान पहुंचा था। अगलगी की घटना के दिन अस्पताल के मालिक नवीन खिची और एक बीएएमएस चिकित्सक आकाश ड्यूटी पर थे। इन दोनों को इस केस में गिरफ्तार किया गया था। इस केस में सोमवार को शहर की एक अदालत में चार्जशीट दायर की गई थी जो 81 गवाहों और फॉरेंसिक रिपोर्ट पर आधारित है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि चार्जशीट में कहा गया है, ‘जांच के दौरान हमने एनआईसीयू को चलाने के लिए जरुरी कुल आठ बिंदुओं की जांच की और इसी के साथ उन नियमों की भी जांच की गई जिसका उल्लंघन अस्पताल ने किया था। सुरक्षा के मद्देनजर अस्पताल के पास ऐसे कोई कागजात नहीं थे जिनसे यह पता चल सके कि वहां सुरक्षा को लेकर जरुरी उपाय किए गए हैं। अस्पताल को 5 बेड की अनुमति थी लेकिन वो 12 बेड के साथ चल रहा था।’ चार्जशीट में कहा गया है कि स्वास्थ्य निदेशालय, दिल्ली की तरफ से जो कागजात मिले हैं उससे साबित होता है कि नर्सिंग होम को साल 2021 में पांच बेडों के साथ एनआईसीयू चलाने का लाइसेंस मिला था। यह लाइसेंस तीन साल के लिए था। लाइसेंस रिन्यूअल का एप्लिकेशन निदेशालय के पास पेंडिंग था। पुलिस अधिकारी ने कहा कि एनआईसीयू में भर्ती नवजातों की देखभाल के लिए सिर्फ एक चिकित्सक की तैनाती थी। किसी योग्य नर्स की तैनाती नहीं थी। पुलिस ने पाया है कि लाइसेंस हासिल करते वक्त आरोपियों ने बताया था कि उनके पास बी श्रेणी के 5 ऑक्सीजन सिलेंडर हैं और डी श्रेणी के 13 सिलेंडर हैं। हालांकि, घटना के वक्त वहां 31 ऑक्सीजन सिलेंडर रखे गए थे। यह नियमों का उल्लंघन है। यह सिलेंडर बेहद ही गलत तरीके से रखे गए थे और आग के वक्त इनमें धमाका हुआ था। पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि अस्पताल के मालिक एक पढ़े-लिखे चिकित्सक तथा एक प्रोफेशनल शख्स हैं। उन्हें इस बात की पूरी जानकारी हैं कि नवजात शिशु काफी नाजुक होते हैं और एक छोटी घटना भी उनकी जान को खतरे में डाल सकती है। इस चार्जशीट में घटना के दिन ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग स्टाफ के बयान लिए गए हैं। उन्होंने कहा है कि नर्सिंग होम के मालिक ने अन्य पुरुष स्टाफ को छत पर खाना बनाने की अनुमति दी थी। यह भी कहा गया है कि नर्सिंग होम का स्ट्रक्चर आपातकाल के लिए सुरक्षित नहीं था। इस चार्जशीट में फॉरेंसिक विशेषज्ञों, दिल्ली फायर सर्विल, इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर और एमसीडी टीम की जांच रिपोर्ट का भी जिक्र किया गया है।
