आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के निर्माण के समस्त सूत्र श्रीमद्भगवद्गीता में विद्यमान है – डा. श्रीप्रकाश मिश्र
All the principles for building a self-reliant and developed India are present in Shrimad Bhagwat Gita - Dr. Shriprakash Mishra
श्रीराम ग्रुप ऑफ कॉलेज ग्वालियर एवं मातृभूमि सेवा मिशन की मध्यप्रदेश इकाई के संयुक्त तत्वावधन में आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के निर्माण में युवा पीढ़ी की भूमिका, श्रीमद्भगवद्गीता के परिप्रेक्ष्य में विषय पर युवा संवाद एवं संगोष्ठी संपन्न।

09 सितम्बर 2024 कुरुक्षेत्र
श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से भारत ने देश और काल की सीमाओं से बाहर पूरी मानवता की सेवा की है ।श्रीमद्भगवद्गीता तो एक ऐसा ग्रंथ है जो पूरे विश्व के लिए है, जीव मात्र के लिए है। दुनिया की कितनी ही भाषाओं में इसका अनुवाद किया गया, कितने ही देशों में इस पर शोध किया जा रहा है, विश्व के कितने ही विद्वानों ने इसका सानिध्य लिया है। ये गीता ही है जिसने दुनिया को निःस्वार्थ सेवा जैसे भारत के आदर्शों से परिचित कराया। नहीं तो, भारत की निःस्वार्थ सेवा, विश्व बंधुत्व की हमारी भावना, ये बहुतों के लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं होती। यह विचार मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने श्रीराम ग्रुप ऑफ कॉलेज ग्वालियर एवं मातृभूमि सेवा मिशन की मध्यप्रदेश इकाई के संयुक्त तत्वावधन में आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के निर्माण में युवा पीढ़ी की भूमिका, श्रीमद्भगवद्गीता के परिप्रेक्ष्य में विषय पर आयोजित युवा संवाद एवं संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किये। कार्यक्रम का शुभारम्भ सरस्वती वंदना से हुआ। कॉलेज परिसर पहुंचने पर डा. श्रीप्रकाश मिश्र का कॉलेज प्रशासन द्वारा पुष्पगुच्छ एवं माल्यार्पण से स्वागत हुआ।कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीराम ग्रुप ऑफ कॉलेज के चेयरमैन हरेंद्र शर्मा ने किया और इंडियन चैंबर्स ऑफ फार्मरस के राष्ट्रीय सचिव अशोक शर्मा अति विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा श्रीमद्भगवद्गीता एक ऐसा ग्रंथ है जिस पर हजारों विद्वानों ने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। श्रीमद्भगवद्गीता भारत की उस वैचारिक स्वतन्त्रता और सहिष्णुता का भी प्रतीक है, जो हर व्यक्ति को अपना दृष्टिकोण, अपने विचार रखने के लिए प्रेरित करती है। किसी के लिए श्रीमद्भगवद्गीता ज्ञान का ग्रंथ है, किसी के लिए सांख्य का शास्त्र है, किसी के लिए योग सूत्र है, तो किसी के लिए कर्म का पाठ है। ऐसी विविधता से परिपूर्ण का सम्पूर्ण विश्व में कोई अन्य ग्रंथ नही है।
श्रीमदभगवदगीता हमें आस्तिक एवं निष्काम कर्म का उपदेश देती है। हम फल की चिंता किये बिना कर्मशील बने। यदि हम कार्य अनपेक्षित कार्य करेंगे तो उसके परिणाम तो अच्छा ही होगा। आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के निर्माण के समस्त सूत्र श्रीमद्भगवद्गीता में विद्यमान है। आज की युवा पीढ़ी श्रीमद्भगवद्गीता की शिक्षाओ को आत्मसात कर आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने सभी विद्यार्थिओ को श्रीमद्भगवद्गीता के सतत् अधययन के लिए प्रेरित करते हुए कहा श्रीमद्भगवद्गीता भारत की एकजुटता, समत्व की भावना का मूल पाठ है।
श्रीमद्भगवद्गीता के विश्वरूप ने महाभारत से लेकर आज़ादी की लड़ाई तक, हर कालखंड में हमारे राष्ट्र का पथप्रदर्शन किया है। भारत को एकता के सूत्र में बांधने वाले आदि शंकराचार्य ने श्रीमद्भगवद्गीता को आध्यात्मिक चेतना के रूप में स्वीकार किया। श्रीमद्भगवद्गीता एक ऐसा आध्यात्मिक ग्रंथ है जिसने ये कहने का साहस किया कि सभी हानि लाभ और इच्छाओं से मुक्त ईश्वर भी बिना कर्म किए नहीं रहता है। इसीलिए,श्रीमद्भगवद्गीता पूरी व्यावहारिकता से इस बात को कहती है कि कोई भी व्यक्ति बिना कर्म किए नहीं रह सकता। हम कर्म से मुक्त नहीं हो सकते। श्रीमद्भगवद्गीता हमें मार्ग दिखाती है, हम पर कोई आदेश नहीं थोपती। श्रीमद्भगवद्गीता ने अर्जुन पर भी कोई आदेश नहीं थोपा था। निश्चित ही, अर्जुन, जो श्रीमद्भगवद्गीता के पहले छात्र थे, वे कोई विद्वान नहीं बल्कि एक योद्धा थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्रीराम ग्रुप ऑफ कॉलेज के चेयरमैन हरेंद्र शर्मा ने कहा मातृभूमि सेवा मिशन धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र द्वारा युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्र के प्रति सामाजिक दायित्व बोध के जागरण के लिये किया जा रहा प्रयास समाज इस लिए अनुकरणीय है। श्रीमद्भगवद्गीता युवा पीढ़ी के लिए औषधि के समान है। अपने कॉलेज के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के लिए आज की संगोष्ठी से प्रेरित होकर शीघ्र ही पुस्तकालय में श्रीमद्भगवद्गीता के विभिन्न भाष्यों को संग्रहित किया जायेगा। कार्यक्रम के अति विशिष्ट अतिथि इंडियन चैंबर्स ऑफ फार्मरस के राष्ट्रीय सचिव अशोक शर्मा ने मातृभूमि सेवा मिशन के राष्ट्रव्यापी कार्यो एवं समस्त सामाजिक गतिविधयों भी विद्यार्थियों को अवगत कराया। श्रीराम ग्रुप ऑफ कॉलेज की ओर से डा. श्रीप्रकाश मिश्र को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। स्वागत भाषण निदेशक अरविन्द तोमर ने किया। आभार ज्ञापन प्रोफ़ेसर अलका प्रधान ने किया। कार्यक्रम का संचालन अनामिका उपाध्याय ने किया। कार्यक्रम में कॉलेज हर शिक्षक, विद्यार्थी एवं अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे।
