प्रदेश के 21 व बुंदेलखंड के 7 जनपदों में कृषि उत्पादकता व अन्नदाताओं की आय में होगी वृद्धि: मुख्यमंत्री

Agricultural productivity and income of food donors will increase in 21 districts of eastern Uttar Pradesh and 7 districts of Bundelkhand: Chief Minister

लखनऊ, 26 अगस्त। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गूगल एवं ग्लोबल एंड नेटवर्क फॉर ह्यूमैनिटी, आईटीसी, एक्वाब्रिज के साथ हुए एमओयू एग्रीकल्चर प्रोडक्टिविटी, किसान की आय और यूपी में कृषि के भविष्य को नई दिशा देने का संकल्प हैं। यूपीएग्रीज प्रदेश के एग्रीकल्चर को प्रोडक्टिविटी से प्रॉस्पैरिटी व फ्यूचर इकॉनमी की ओर ले जाने की महत्वपूर्ण पहल है। इसका लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसान की आय, फॉर्मिंग की क्लाईमेट रेजिलिएंट कैपिसिटी (जलवायु अनुकूलन क्षमता) को वैल्यू एडिशन व रूरल एंटरप्रेन्योरशिप को एक साथ मजबूत करना भी है। ये एमओयू पूर्वी उत्तर प्रदेश के 21 तथा बुंदेलखंड के 7 जनपदों में कृषि उत्पादकता व अन्नदाताओं की आय में वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

मुख्यमंत्री की उपस्थिति में बुधवार को विश्व बैंक वित्तपोषित उत्तर प्रदेश एग्रीकल्चर ग्रोथ एंड रूरल एंटरप्राइज इकोसिस्टम स्ट्रेंथनिंग (यूपी-एग्रीज) परियोजना के अंतर्गत यूपीडीएएसपी (उत्तर प्रदेश विविधीकृत कृषि सहायता परियोजना) के साथ ये एमओयू हस्ताक्षरित किए गए।

इस अवसर पर सीएम योगी ने कहा कि गत वर्ष विश्व बैंक के अध्यक्ष का आगमन हुआ था। उप्र के वे क्षेत्र, जो उस समय कृषि प्रोडक्टिविटी में अत्यंत पिछड़े थे। वहां क्या होना चाहिए, इस पर उनसे चर्चा हुई, फिर यूपीएग्रीज की इस योजना को हमने आगे बढ़ाया। यूपीएग्रीज पीएम मोदी जी और विश्व बैंक के अध्यक्ष के विजन के अनुरूप यूपी में धरातल पर कार्य करते दिख रहा है। यह एमओयू उसी कड़ी को मजबूत तरीके से बढ़ाने के लिए किया गया है। हम दशकों तक यही सुनते रहे कि अन्नदाता किसानों की जय-जयकार होती थी। देश में अन्न उत्पादन बढ़ाने के दावे किए जाते थे। पैदावार बढ़ती भी थी, लेकिन किसान वहीं का वहीं खड़ा था। किसान को कभी नहीं बताया गया कि लागत कैसे घटेगी, उसकी फसल को कौन खरीदेगा और उसका माल मंडी तक कैसे जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 4000 करोड़ की विश्व बैंक समर्थित इस परियोजना का फोकस पूर्वी उत्तर प्रदेश व बुंदेलखंड है। जहां पोटेंशियल भी है और परिवर्तन की आवश्यकता भी। इन क्षेत्रों को पिछड़ेपन का पर्याय मानकर दशकों तक उपेक्षित छोड़ दिया गया था। जो क्षेत्र कभी सरकार के लिए चिंता व तनाव का कारण होता था, आज वही क्षेत्र सरकार की प्राथमिकता व प्रदेश के प्रोडक्टिविटी का कारण भी बन रहा है। हम पूर्वी उप्र व बुंदेलखंड के 28 जनपदों के 123 विकास खंडों में इस परियोजना को लागू कर रहे हैं। इसका लक्ष्य लगभग 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करते 10 लाख किसानों, 35 हजार मत्स्य उत्पादक किसानों व 3 लाख महिलाओं को लाभ पहुंचाना है। परियोजना के अंतर्गत खरीफ 2026 में 1.75 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को आच्छादित किया गया है। रबी फसल (2026-27) में भी 1.75 लाख हेक्टेयर में गेहूं, मटर, चना, मसूर व सरसों आदि की उत्पादकता बढ़ाने का लक्ष्य है। हमें किसान को केवल प्रोड्यूसर नहीं, बल्कि आधुनिक कृषि व अर्थव्यवस्था का प्रॉस्पैरिटी पार्टनर भी बनाना है।

सीएम ने कहा कि ईरी के साथ पार्टनरशिप के माध्यम से साइंटिफिक व क्लाईमेटिक विजिलेंट जैसी पद्धतियों को खेतों तक पहुंचाया जा रहा है। खरीफ सत्र 2026 में 3000 हेक्टेयर क्षेत्र में डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) का प्रयोग किया जा रहा है। धान के साथ मक्का, बाजरा, ज्वार, अरहर, तिल, उरद व मूंगफली जैसी फसलों को भी कार्ययोजना में सम्मिलित किया है। उप्र की कृषि परंपरा की शक्ति व आधुनिक विज्ञान के संगम से इसे बढ़ाने में मदद मिलेगी। ग्लोबल साइंस अब लोकल फॉर्म तक पहुंच रहा है।

सीएम ने कहा कि गूगल एवं नेटवर्क फॉर ह्यूमैनिटी के साथ साझेदारी में ओपन नेटवर्क फॉर एग्रीकल्चर विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। यह कृषि के लिए ऐसा डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर होगा, जिसका कॉन्सेप्ट यूपीआई और ओएनडीसी जैसे ओपन डिजिटल नेटवर्क मॉडल से भी प्रेरित है। इससे किसानों को अलग-अलग सेवाओं के लिए अलग ऐप व प्लेटफॉर्म की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि हमारा लक्ष्य एक ही इंटरफेस से मौसम, बाजार-मूल्य, मृदा, कृषि सलाह तथा विभिन्न एग्रीटेक सेवाओं तक उनकी पहुंच बनाना है।

सीएम ने कहा कि एग्रीटेक स्टार्टअप व कंपनियां भी खुले नेटवर्क के माध्यम से बड़ी संख्या में किसानों तक सेवाएं पहुंचा सकेंगी। हमारा लक्ष्य लागत को कम करना, कम संसाधन व अधिक आय के साथ ही वैश्विक बाजार के अनुरूप गुणवत्ता उपलब्ध कराना भी है। यूपीएग्रीज के अंतर्गत धान और गेहूं के क्लाईमेट रेजिलिएंट कमोडिटी कलस्टर विकसित करने के लिए आईटीसी के साथ भी साझेदारी की जा रही है। दो लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में क्लाईमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर का विस्तार प्रस्तावित है। इसमें आधुनिक पद्धति यानी शून्य जुताई, डायरेक्ट सीडेड राइस, क्लाईमेट रेजिलिएंट उन्नत बीज, डिसिजन न्यूट्रेंट मैनेजमेंट सम्मिलित होगा।

सीएम ने कहा कि बहराइच में 1500 एकड़ का डीयू कंप्लाइन एंड एमआरएल मानकों के अनुरूप धान कलस्टर विकसित करने का प्रस्ताव है। किसान की प्रति एकड़ आय में 20-30 प्रतिशत वृद्धि, यूरिया के उपयोग को 25 फीसदी कम करने तथा श्रम व सिंचाई में 25-30 प्रतिशत की बचत का भी लक्ष्य रखा गया है। अब यूपी का किसान केवल अनाज उत्पादक नहीं रहेगा, बल्कि क्वालिटी, कैपेबिलिटी व एक्सपोर्ट स्टैंडर्ड से जुड़ी नई एग्री इकॉनमी का भी भागीदार बनेगा।

सीएम ने कहा कि यूपीएग्रीज के अंतर्गत धान, गेहूं, मिर्च, मक्का, हरी मटर व टमाटर जैसी फसलों के लिए भी प्रमुख निजी कंपनियों के साथ साझेदारी की जा रही है, जिससे किसानों को बाजार व बेहतर खरीद की व्यवस्था उपलब्ध हो पाएगी। इसके अंतर्गत वैल्यू चेन के प्रत्येक चरण में उत्पादन, संग्रहण, भंडारण, प्रसंस्करण व बाजार को और मजबूत किया जाएगा। हम उत्तर प्रदेश में एक्वा कल्चर को साइंस, टेक्नोलॉजी, प्रोसेसिंग व एंटरप्रेन्योरशिप से जोड़कर पूर्ण ब्लू इकॉनमी इकोसिस्टम विकसित करना चाहते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए एक्वाब्रिज के साथ मत्स्य पालन को ट्रेडिशनल एक्टिविटी से टेक्नोलॉजी ड्रिवेन एंटरप्राइज की ओर बढ़ाने जा रहे हैं। एक्वाब्रिज के साथ साझेदारी के माध्यम से मत्स्य किसानों, सहकारिता समितियों व उद्यमियों को आधुनिक तकनीक व प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा। इसमें एआई आधारित एक्वाकल्चर मैनेजमेंट, ऑटोमैटिक फीडिंग टेक्नोलॉजी, आधुनिक प्रशिक्षण व कैपिसिटी बिल्डिंग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

सीएम ने कहा कि यूपीएग्रीज के अंतर्गत उन्नाव में आईएमसी इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत 60 एकड़ क्षेत्र में इंटीग्रेटेड एक्वाकल्चर परियोजना विकसित की जा रही है। इसमें हेचरी, फीड मैन्यूफेक्चरिंग, प्रोसेसिंग फैसिलिटी, डेडिकेटेड ट्रेनिंग सेंटर भी प्रस्तावित है। कृषि को खेत से फूड प्रोसेसिंग, एक्सपोर्ट एवं ग्लोबल वैल्यू चेन तक ले जाने की तैयारी है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निकट मेगा फूड पार्क एवं एग्री एक्सपोर्ट सेंटर विकसित करने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य यूपी की कृषि उपज को मंडी से आगे प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन, लॉजिस्टिक व एक्सपोर्ट से जोड़ना है। यूपीएग्रीज का नया सूत्र व मूलदर्शन प्रोडक्टिविटी, टेक्नोलॉजी, क्लाईमेट रेजिलिएंट, मार्केट, एंटरप्राइज, फॉर्मर प्रॉस्पैरिटी है। हमारा लक्ष्य किसानों को बेहतर बीज और तकनीक से प्रोडक्टिविटी, क्लाईमेट स्मार्ट फॉर्मिंग से सस्टेनबिलिटी, डिजिटल नेटवर्क से इन्फॉर्मेशन एंड सर्विस तक पहुंच, कमोडिटी कलस्टर से बाजार, प्रोसेसिंग व इंफ्रास्ट्रक्चर से वैल्यू एडिशन, एफपीओ व निजी निवेशक के माध्यम से रूलर एंटरप्रेन्योरशिप और ग्रामीण विकास तक ले जाना है।

सीएम ने कहा कि 21वीं सदी मिट्टी व मौसम के साथ डेटा साइंस, साइंस टेक्नोलॉजी और मार्केट इंटेलिजेंस से भी संचालित होगी। यूपीएग्रीज के साथ प्रदेश सरकार कृषि को इस भविष्य के लिए तैयार कर रही है। हमारा लक्ष्य किसान को एग्री इनोवेशन की नई इकॉनमी का सक्रिय भागीदार बनाना है। यूपी कृषि का अगला चरण प्रोडक्टिविटी, सस्टेनबिलिटी व प्रॉस्पेरिटी को साथ लेकर चलने वाली स्मार्ट एग्री रेगुलेशन का केंद्र बनना है। जब खेत डिजिटल होंगे, खेती क्लाईमेट स्मार्ट होगी, उत्पादन क्वालिटी ड्रिवेन व बाजार ग्लोबल होगा तो किसान की आय में वृद्धि होगी। इससे कृषि मॉडल का स्वाभाविक परिणाम भी आएगा।

सीएम ने अतिथियों को ओडीओपी का स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर श्रम व सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर, उप्र ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह, कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार, प्रमुख सचिव (कृषि) रविंद्र, प्रमुख सचिव पंधारी यादव, विश्व बैंक के अनूप जगवानी, गूगल के सिद्धार्थ प्रकाश, एक्वाब्रिज से मो. ताबिश, नेटवर्क फॉर ह्यूमैनिटी से राधा किझनट्टम, आईटीसी के सचिन शर्मा, सीआईपी के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह, सिद्धि नायक एग्रो. लि. के हेमंत गौर आदि मौजूद रहे।

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