जम्मू कश्मीर में ‘परिवारवादी दलों को रोकना भाजपा का लक्ष्य’

BJP's aim is to stop family-oriented parties in Jammu and Kashmir

नई दिल्ली,भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जम्मू कश्मीर के आगामी विधानसभा चुनावों में यदि सरकार बनाने की स्थिति में नहीं आती है तो ऐसे में उसकी कोेशिश होगी कि किसी भी तरह से परिवारवादी पार्टियों के नेताओं को सत्ता में नहीं आने दिया जाये।

पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व का कहना है कि जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव सितंबर 2024 में कराये जाने के हिसाब से सांगठनिक तैयारी है। बीते लोकसभा चुनावों में उसने जिन दो लाेकसभा सीटों पर जीत दर्ज की है, उसके हिसाब से उसे 29 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त हासिल हुई थी। भाजपा का लक्ष्य है कि वह अपने दम पर किसी तरह से 35 से अधिक सीटें जीत जायें तथा कश्मीर घाटी में वह कुछ छोटे-छोटे दलों से गठबंधन करके परिवारवादी – नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी का नेतृत्व करने वाले परिवारों को सत्ता में आने से रोकें।

भाजपा को लगता है कि लोकसभा चुनावों के हिसाब से देखा जाये तो घाटी में भाजपा को कोई वोट नहीं देगा और तो वह छोटे प्रभावशाली दलों से गठबंधन करना ठीक रहेगा हालांकि लोकसभा चुनावों में उसकी सहयोगी पार्टी जम्मू कश्मीर पीपुल्स पार्टी को केवल एक या दो विधानसभा सीटों पर ही बढ़त मिली थी। भाजपा के कुछ पुराने एवं स्थानीय नेताओं को लगता है कि भाजपा के नेतृत्व ने कश्मीर घाटी को बीते पांच साल में जिस गंभीरता से लेना चाहिए था, वैसा नहीं हुआ।

भाजपा इन दिनों एक और सवाल से परेशान है कि क्या जम्मू कश्मीर में बदलते हालात में विधानसभा चुनाव कराने चाहिये कि नहीं। इस पर भाजपा में इस केन्द्र शासित प्रदेश के प्रभारी महासचिव तरुण चुघ का कहना है कि हालात तो स्थायी नहीं होते हैं, लेकिन हमें पार्टी के हित से अधिक देश का हित देखना है और इसलिए हमें चुनाव कराना ही होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा को लोकसभा चुनावों में 90 में से 29 सीटों पर बढ़त हासिल हुई थी। विधानसभा चुनावों में हमें इसे 35 से 40 तक लेकर जाना है और उन परिवारवादी पार्टियों को रोकना है जिन्होंने संविधान के अनुच्छेद 370 एवं 35 ए की आड़ में जम्मू कश्मीर को अपने राजनीतिक स्वार्थों के लिए हिंसा एवं अलगाववाद को परोक्ष रूप में सींचा और पालापोसा है।

भाजपा के सूत्रों का कहना है कि पार्टी की कोशिश होगी कि यदि उसका मुख्यमंत्री नहीं आता है तो कम से कम विधानसभा अध्यक्ष भाजपा का होना चाहिए। ताकि विधानसभा में कोई ऐसी गतिविधि को अनुमति मिले जो भारत की अखंडता को नुकसान पहुंचा सकती हो। जम्मू कश्मीर विधानसभा की नौ सीटों को गुज्जर, बक्करवाल आदि अनुसूचित जनजातियों एवं अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित किया गया है, भाजपा नेतृत्व इन वर्गों के लोगों के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने और इसके लिए विपक्ष द्वारा चलाये गये दुष्प्रचार अभियान को रोकने का प्रयास कर रहा है।

भाजपा का कहना है कि बीते पांच वर्षों में केन्द्र की मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर में विकास कार्यों को जो गति प्रदान की है और इसका असर आम लोगों के जीवन पर जिस प्रकार पड़ा है, उससे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की लोकप्रियता बढ़ी है। उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री की छवि को चमकाने के लिए जी जान से विकास कार्यों को गति प्रदान की और परिणामों को ज़मीन पर उतारा। कश्मीर घाटी में चहुंओर उप राज्यपाल की प्रशंसा हाे रही है। हालांकि जम्मू क्षेत्र में तस्वीर कुछ अलग है।

गुज्जर बक्करवाल आदि आदिवासी समाजों में मोदी सरकार की छवि अच्छी होने के बावजूद भाजपा के प्रदेश संगठन के नेताओं का कोई खास आकर्षण नहीं बन पाया है। स्थानीय जानकारों का कहना है कि प्रदेश संगठन में बदलाव भी विधानसभा चुनावों के पहले करना जरूरी है और संगठन की दृष्टि से प्रशिक्षित एवं साफ सुथरी छवि वाले चेहरे को पार्टी को कमान दी जानी चाहिए। पार्टी में बूथ स्तर के संगठन की फिर से समीक्षा करनी भी जरूरी होगी।

 

 

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