सीईजीआर ने किया ‘करिकुलम एंड एग्जाम रिफॉर्म्स’ विषय पर वेबिनार
CGR discusses 'Curriculum and Exam Reforms' on Webinar
शिक्षाविदों ने एक स्वर में कहा समय की मांग है पाठ्यक्रम और परीक्षा सुधार

नई दिल्ली. देश में शिक्षा के क्षेत्र में एक अग्रणी थिंक टैंक सेंटर फॉर एजुकेशन ग्रोथ एंड रिसर्च (सीईजीआर) ने ‘करिकुलम एंड एग्जाम रिफॉर्म्स’ विषय पर वेबिनार का आयोजन किया. इस वेबिनार में देश भर से कई चांसलर, वाईस चांसलर और शिक्षाविदों ने भाग लिया. वेबिनार में एएसएम ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूट के चेयरमैन डॉ. संदीप पचपांडे, आईईएस यूनिवर्सिटी के चांसलर ईआर. बी.एस यादव, कैपिटल यूनिवर्सिटी के चांसलर पवन सैनी, ग्लोबल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फार्मास्यूटिकल एंड एजुकेशनल रिसर्च के चेयरमैन प्रोफेसर अनील सक्सेना, आर.वी.एस ग्रुप ऑफ़ इंस्टीटूशन्स, कोयंबटूर के मैनेजिंग ट्रस्टी डॉ. के. सेंथिल गणेश, जे.आई.एस यूनिवर्सिटी, कोलकाता के प्रो-चांसलर डॉ. नीरज सक्सेना, महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर एन के सिन्हा, मैट्स यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर के.पी यादव और सीईजीआर के डायरेक्टर रविश रोशन समेत कई शिक्षाविद स्पीकर के रूप में शामिल हुए. सीईजीआर शिक्षा में सुधार को लेकर समय-समय पर कॉन्फ्रेंस और वेबिनार का आयोजन करता रहता है. नई शिक्षा नीति 2020 के प्रमुख पहलुओं पर प्रकाश डालने के लिए पाठ्यक्रम और परीक्षा सुधारों पर वेबिनार का आयोजन किया गया. इस वेबिनार में वक्ताओं ने कुछ महत्वपूर्ण विचार रखे .
वेबिनार में एएसएम ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूट के चेयरमैन डॉ. संदीप पचपांडे ने मूल्यांकन संबंधी सुधारों के बारे में एनईपी 2020 की महत्वपूर्ण सिफारिशों की विशेषताएं बताईं. आज नई शिक्षा नीति 2020 (एनईपी -2020) में छात्रों के सीखने की प्रक्रिया को प्रधान बनाने और उनके विकास पर जोर दिया गया है. एनईपी 2020 की व्याख्या करते हुए बताया कि यह, मूल्यांकन प्रक्रिया को नियमित, रचनात्मक और योग्यता आधारित बनाने पर जोर देती है जो छात्रों में सीखने की प्रवृत्ति को बढ़ाए, छात्रों की योग्यता और उच्चस्तरीय कुशलता (विश्लेषण, आलोचनात्मक चिंतन और वैचारिक स्पष्टता आदि) का विकास करे. आर.वी.एस ग्रुप ऑफ़ इंस्टीटूशन्स, कोयंबटूर के मैनेजिंग ट्रस्टी डॉ. के. सेंथिल गणेश ने कहा कि एनईपी 2020 के उस प्रावधान की प्रशंसा की जिसमें प्रतिभाशाली छात्रों को समर्थन देने की बात कही गई है. प्रतिभाशाली छात्रों को सामान्य स्कूली पाठ्यचर्या के बाहर जाकर अन्य क्षेत्रों में काम करने के लिए प्रोत्साहित करने की बात कही गई है. यदि शिक्षा क्षेत्र में किसी एक सुधार की ज़रूरत है तो वह है परीक्षा व्यवस्था में सुधार. भारत समय के साथ परीक्षा द्वारा मानांकन से अब योग्यता मूल्यांकन की ओर बढ़ा है. फिर भी अभी और कई पहल किए जाने की जरूरत है. कैपिटल यूनिवर्सिटी के चांसलर पवन सैनी ने कहा कि आज का पाठ्यक्रम थ्योरेटिकल होने के बजाए प्रैक्टिकल होना चाहिए. ग्लोबल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फार्मास्यूटिकल एंड एजुकेशनल रिसर्च के चेयरमैन प्रोफेसर अनील सक्सेना ने कहा कि शोध से पता चला है कि छात्रों की सीखने की क्षमता उनकी सक्रिय भागीदारी से बढ़ती है. छात्र जब वाद विवाद, अभ्यास और अन्य को सिखाने के ज़रिए सीखते हैं तो वह ज्यादा याद रहता है. कितना सीखा है उसका मूल्यांकन और सीखते समय मूल्यांकन दोनों बेहद ज़रूरी है. छात्र के विकासात्मक मूल्यांकन के लिए उसका समेकित पठन पाठन और मूल्यांकन एक बेहद महत्वपूर्ण औजार है. यह अध्यापकों पर प्रलेखीकरण के भार को कम करता है और छात्र केंद्रित और गतिविधि आधारित शिक्षण के लिए प्रोत्साहित करता है. इसमें जोर कथ्य याद करने पर नहीं बल्कि क्षमता निर्माण पर रहता है. इस तरह का मूल्यांकन छात्र को डराने वाला न होकर उसे तनावमुक्त करने वाला होता है. वेबिनार में बोलते हुए मैट्स यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर के.पी यादव ने कहा कि आज पहले की तरह रटने का हिसाब न हो बल्कि उसे समझने का हो. पाठ्यक्रम यह तय करता है कि विद्यार्थी किस स्तर पर क्या सीखेंगे, कैसे सीखेंगे, और कौन सी सामग्री का उपयोग होगा. इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को निर्दिष्ट विषयों या क्षेत्रों में ज्ञान एवं कौशल प्राप्त कराना होता है. जे.आई.एस यूनिवर्सिटी, कोलकाता के प्रो-चांसलर डॉ. नीरज सक्सेना ने कहा कि अब छात्रों का एकमात्र लक्ष्य अच्छे अंक पाना ही रह गया है. समाज भी ऐसे छात्रों को प्राथमिकता देता है जो अच्छे अंक लाते हैं. अब समय आ गया है कि परीक्षा का मुख्य उद्देश्य छात्रों का बहुमुखी विकास हो जाना चाहिए. मूल्यांकन का तरीका ऐसा होना चाहिए जिससे पठन पाठन की प्रक्रिया के दौरान छात्रों की क्षमता के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त हो. हमारा ध्यान छात्रों के समग्र विकास के साथ साथ अन्य सभी संबद्ध क्षेत्रों के मूल्यांकन पर भी होना चाहिए. वेबिनार को मॉडरेट करते हुए सेंटर फॉर एजुकेशन ग्रोथ एंड रिसर्च (सीईजीआर) के डायरेक्टर रविश रोशन ने कहा कि शिक्षा राष्ट्र की उन्नति की आधारशिला है. पाठ्यक्रम सुधार को पाठ्यक्रम में परिवर्तन लागू करने की प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जिसका उद्देश्य सीखने और पढ़ाने को अधिक सार्थक और प्रभावी बनाना है.
