डिफेंस स्कूल की वंशिका ने कुश्ती में जीता जिला स्तरीय स्वर्णिम स्थान
Dhanshika of defense school won district level gold position in wrestling
32 किलोग्राम भार वर्ग में प्रथम स्थान हासिल कर बढ़ाया विद्यालय का गौरव, जिला समन्वयक राजेश वशिष्ठ ने विद्यालय पहुंचकर किया सम्मानित

रेखा रानी
जींद:- प्रतिभा किसी परिचय की मोहताज नहीं होती। जरूरत होती है उसे पहचानने, निखारने और सही दिशा देने की। इसी का उदाहरण राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक विद्यालय डिफेंस स्कूल की छात्रा वंशिका ने पेश किया है। वंशिका ने जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में कुश्ती के 32 किलोग्राम भार वर्ग में प्रथम स्थान प्राप्त कर विद्यालय और क्षेत्र का नाम रोशन किया। छात्रा की इस उपलब्धि पर विद्यालय में खुशी का माहौल है। शिक्षकों ने इसे बच्चों की प्रतिभा, मेहनत और उचित मार्गदर्शन का परिणाम बताया। निपुण मिशन के जिला समन्वयक एफएलएन राजेश वशिष्ठ ने विद्यालय पहुंचकर प्रतिभाशाली छात्रा वंशिका को पुरस्कृत किया और उसकी उपलब्धि की सराहना करते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि छोटी उम्र में खेल के क्षेत्र में इस तरह की उपलब्धि हासिल करना छात्रा की मेहनत, लगन और आत्मविश्वास को दर्शाता है। ऐसी सफलताएं दूसरे बच्चों को भी आगे बढ़ने और अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए प्रेरित करती हैं।
बच्चों में प्रतिभा की कमी नहीं, जरूरत सही दिशा की
राजेश वशिष्ठ ने कहा कि बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं होती। प्रत्येक बच्चे में कुछ विशेष करने की क्षमता होती है। आवश्यकता इस बात की है कि शिक्षक और अभिभावक उस प्रतिभा को पहचानें और उसे निखारने के लिए उचित अवसर उपलब्ध करवाएं। जब बच्चों को प्रोत्साहन, मार्गदर्शन और अपनी क्षमता साबित करने का अवसर मिलता है, तो वे सफलता की नई ऊंचाइयों को छू सकते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक को गुरु का दर्जा इसलिए दिया गया है, क्योंकि शिक्षक केवल पाठ्यपुस्तकों का ज्ञान ही नहीं देता, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व, सोच, अनुशासन और भविष्य के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक समर्पित शिक्षक अपने विद्यार्थियों की छिपी हुई प्रतिभा को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता दिखाता है। वंशिका की सफलता भी इसी सकारात्मक सोच और मार्गदर्शन की प्रेरक मिसाल है।
शिक्षकों के जुनून और मेहनत से निखर रही प्रतिभा
राजेश वशिष्ठ ने विद्यालय के मुख्य शिक्षक मोहनलाल और अन्य शिक्षकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षक का समर्पण, जुनून और निरंतर प्रयास बेहद महत्वपूर्ण है। जब शिक्षक अपने विद्यार्थियों की सफलता को अपना लक्ष्य बनाकर काम करते हैं, तो उसके सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं। विद्यालय के शिक्षकों ने बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद और अन्य गतिविधियों में आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करना नहीं, बल्कि बच्चों का सर्वांगीण विकास करना भी है। खेल बच्चों में अनुशासन, आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता, संघर्ष करने का जज्बा और हार-जीत को सकारात्मक रूप से स्वीकार करने की भावना विकसित करते हैं। कुश्ती जैसे खेल बच्चों को शारीरिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ मानसिक दृढ़ता भी प्रदान करते हैं।
विद्यालय परिवार ने दी बधाई
वंशिका की उपलब्धि पर मुख्य शिक्षक मोहनलाल, प्राचार्य नरेंद्र खटकड़, कक्षा अध्यापक रमेश कुमार तथा अध्यापक कुलदीप, सत्यनारायण, कृष्ण और संजीव ने छात्रा को बधाई दी। शिक्षकों ने कहा कि वंशिका की सफलता विद्यालय के अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उसकी उपलब्धि से दूसरे बच्चों को भी खेलों में भाग लेने, नियमित अभ्यास करने और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा मिलेगी। विद्यालय परिवार ने विश्वास जताया कि उचित मार्गदर्शन और निरंतर मेहनत के बल पर वंशिका भविष्य में भी बेहतर प्रदर्शन करेगी। छात्रा की इस उपलब्धि ने एक बार फिर साबित किया है कि यदि बच्चों को सही दिशा, प्रोत्साहन और अवसर मिले, तो वे कम उम्र में भी अपनी मेहनत से बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं।
