रावण के वध और राम के अयोध्या वापसी व राजतिलक के दर्शयों ने दर्शकों को भाव विभोर किया

The scenes depicting the slaying of Ravana, Rama’s return to Ayodhya, and his coronation left the audience deeply moved.

कुलदीप कुमार, देहरादून: बालावाला में पिछले चौदह वर्ष से चली आ रही राम लीला का कुंभकरण व रावण वध तथा भगवान श्री राम का सीता जी व लखन हनुमान जी के साथ अयोध्या आगमन व श्री राम जी का राज तिलक का भव्य मंचन के साथ ही विश्राम हो गया। समारोह के समापन अवसर पर मुख्य अतिथी के रुप में प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने दीप प्रज्वलित कर अंतिम दिवस की रामलीला का शुभारंभ किया। इस अवसर पर श्री धस्माना ने श्रद्धालु श्रोताओं को राम लीला के निर्विघ्न पूर्ण होने की शुभकामनायें देते हुये कहा कि कलिकाल में भगवान राम से भी बड़ा भगवान का नाम स्मरण व नाम जपना है उन्होंने राम चरित मानस की चौपाई “यहि कलिकाल ना साधन दूजा जोग जग्य जप तप व्रत पूजा रामही सुमरिह गाहही रामही संतत सुनही राम गुण ग्रामही। । ” उन्होंने कहा कि राम घट घट में व्यापत हैं और जहां प्रेम हो वहां राम स्वयं प्रकट हो जाते हैं तभी तुलसी बाबा ने कहा कि “रामही केवल प्रेम पियारा जानही ले जो जाननिहारा ” श्री धस्माना ने कहा कि राम की कथा अनंत है जो कभी खत्म नहीं होती निरंतर चलती रहती है।
इस अवसर पर राम लीला समिती अध्यक्ष श्री गोपाल सिंह तडियाल श्री सुनील प्रसाद भदोला श्री मंगल सिंह रावत श्री गणेश रावत श्री यशवंत सिंह असवाल श्री मनीष बुडाकोटी आदि पदाधिकारियों ने श्री धस्माना का अंग वस्त्र व प्रतीक चिह्न भेंट कर स्वागत किया।

You might also like