आईआईटी रोपड़ ने योगिक विज्ञान एवं समग्र विकास केंद्र का उद्घाटन किया
IIT Ropar inaugurates Yogic Science and Overall Development Centre
• डॉ. ईशान शिवानंद ने भारत के शिव सूत्रों पर आधारित, एआई में विवेक मापने का ढांचा प्रस्तुत किया
• हमारे विद्यार्थी वह एआई बनाएंगे, जिसका उपयोग दुनिया करेगी: प्रो. राजीव आहूजा, निदेशक, आईआईटी रोपड़

रोपड़/ चंडीगढ़: 2 नवंबर : आईआईटी रोपड़ ने आज Beyond Intelligence: Defining and Measuring Wisdom for AI नामक श्वेत पत्र का लोकार्पण आयोजित किया। यह श्वेत पत्र बताता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को केवल बुद्धि ही नहीं, बल्कि विवेक की कसौटी पर कैसे परखा जा सकता है। इसका लोकार्पण संस्थान में आयोजित Shaping the AI Mind कार्यक्रम में हुआ। इस अवसर पर आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा और स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में निदेशक (शोध) तथा आईआईटी रोपड़ में एडजंक्ट फैकल्टी डॉ. ईशान शिवानंद उपस्थित थे।
श्वेत पत्र का लोकार्पण डॉ. ईशान शिवानंद ने किया। वे स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में निदेशक (शोध), आईआईटी रोपड़ में एडजंक्ट फैकल्टी और वैश्विक मानसिक स्वास्थ्य गठबंधन कम्पैशन यूनाइट्स (Compassion Unites) के संस्थापक हैं। यह पत्र उन्होंने डॉ. अंजलि समानी के साथ मिलकर लिखा है। डॉ. समानी सेल्सफ़ोर्स (Salesforce) में एआई और डेटा साइंस की पूर्व वरिष्ठ अधिकारी हैं। श्वेत पत्र बताता है कि एआई में विवेक को कैसे परिभाषित, मापा और परखा जा सकता है। यह डॉ. शिवानंद के शिव सूत्रों और मन पर भारत के शास्त्रीय ग्रंथों के अध्ययन पर आधारित है।
कार्यक्रम में डॉ. ईशान अवधूत शिवानंद योगिक विज्ञान एवं समग्र विकास केंद्र का उद्घाटन भी हुआ। यह केंद्र आईआईटी रोपड़ में स्थापित किया गया है। इसका वित्तपोषण डॉ. शिवानंद ने किया है।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा ने कहा, “हमारे विद्यार्थी वह एआई बनाएंगे, जिसका उपयोग दुनिया करेगी। आज जैसी चर्चाएं उन्हें यह सोचने में मदद करती हैं कि इसे कुशलता के साथ-साथ विवेक से कैसे बनाया जाए।”
प्रो. आहूजा ने आगे कहा, “आज एआई प्रणालियां पेशेवर परीक्षाएं पास कर सकती हैं और भावनात्मक बुद्धिमत्ता के परीक्षणों में भी अच्छे अंक लाती हैं। लेकिन वे अक्सर लोगों को वही बताती हैं जो वे सुनना चाहते हैं, वह नहीं जो उनके लिए अच्छा है।”
इस वर्ष Science पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि रोज़मर्रा की सलाह मांगे जाने पर अग्रणी एआई प्रणालियों ने इंसानों की तुलना में लगभग 49 प्रतिशत अधिक बार उपयोगकर्ता का पक्ष लिया। यह समस्या वैश्विक है। वर्ष 2025 में ओपनएआई (OpenAI) ने ChatGPT का एक अपडेट वापस ले लिया था, क्योंकि वह ज़रूरत से ज़्यादा चापलूस हो गया था। कंपनी ने कहा था कि उसने “अल्पकालिक फ़ीडबैक पर बहुत अधिक ध्यान दिया।”
श्वेत पत्र का तर्क है कि एआई में बुद्धि की कमी नहीं है। उसमें विवेक की कमी है। विवेक को मापने के लिए लेखकों ने HEED नाम का एक मॉडल प्रस्तुत किया है। HEED का अर्थ है हानि (Harm), अहंकार (Ego), धैर्य (Endurance) और विवेक (Discernment)। यह मॉडल छह घटकों को जोड़ता है: ज्ञान, मूल्य, संदर्भ, विवेक, धैर्य और अहंकार। यह पहला शोध एआई के उत्तरों का मूल्यांकन करता है। लोगों के निर्णयों, कल्याण और विवेक पर इसके प्रभाव को जानने के लिए आगे और अध्ययन करने होंगे।
शिव सूत्र अहंकार, यानी मान्यता पाने की चाह को, वह कारण बताते हैं जो विवेक पर पर्दा डालता है। एआई में भी यही कमी दिखती है, जिसे “सायकोफेंसी” (चापलूसी की प्रवृत्ति) कहा जाता है। वह सच बताने के बजाय ऐसे उत्तर देता है जो उपयोगकर्ता को अच्छे लगें।
HEED के अनुसार, जब कोई एआई अपने ज्ञान और मूल्यों का सही निर्णय के साथ उपयोग करता है, तो उसे अधिक अंक मिलते हैं। जब खुश करने की चाह आड़े आती है, तो अंक घट जाते हैं। कोई भी उत्तर, जिससे गंभीर हानि हो सकती है, उसे शून्य अंक मिलते हैं। इस मॉडल का परीक्षण पहले अंग्रेज़ी, हिंदी और हिंग्लिश में किया जाएगा। आगे इसे अन्य भाषाओं तक बढ़ाने की योजना है।
डॉ. ईशान शिवानंद ने कहा, “हमारा उद्देश्य ऐसा विवेकशील एआई विकसित करना है, जो लोगों को अपना विवेक मज़बूत करने में मदद करे। सनातन परंपराओं, जिनमें कठोपनिषद और योग सूत्र शामिल हैं, के उनके व्यापक अध्ययन से मॉडल की विवेक, अहंकार और अहिंसा की समझ को आधार मिलता है। HEED इन शास्त्रीय संस्कृत ग्रंथों के साथ-साथ एआई और विवेक के मनोविज्ञान के शोध पर आधारित है।”
डॉ. शिवानंद ने कहा, “हज़ारों वर्षों से भारत यह अध्ययन करता आया है कि मन विवेकशील कैसे बनता है और उस पर पर्दा क्या डालता है। आज हम एक नए प्रकार का मन बना रहे हैं, एक कृत्रिम मन, जो हमारे समाज के हर पहलू का हिस्सा बनता जा रहा है। यह पत्र वह सार प्रस्तुत करता है जो शिव सूत्र मानव मन में विवेक विकसित करने के बारे में सिखाते हैं, और उसे कृत्रिम मन पर लागू करता है।”
डॉ. अंजलि समानी ने कहा, “हम एआई को इस बात पर तो कड़ाई से परखते हैं कि वह क्या जानता है, लेकिन इस पर नहीं कि उसकी सलाह विवेकपूर्ण है या नहीं। यह पत्र उसे मापने का तरीका देता है, ताकि एआई बनाने वाला, उसे नियमित करने वाला या उस पर निर्भर रहने वाला हर व्यक्ति देख सके कि वह कहां सही है और कहां कमज़ोर पड़ता है।”
डॉ. शिवानंद इस ढांचे को परखने के लिए स्वतंत्र शोध हेतु खुली आमंत्रण प्रक्रिया (ओपन कॉल) के लिए आरंभिक वित्तीय सहायता दे रहे हैं। स्वतंत्र सदस्यों वाली एक समिति शोध टीमों का चयन करेगी। ये टीमें मॉडल का परीक्षण करेंगी और दुनिया भर के एआई डेवलपर्स के लिए एआई में विवेक का एक खुला बेंचमार्क, HEEDBench, तैयार करेंगी।
